पृष्ठ

शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

मीडिया पर हमला निंदनीय

मेरी शिफ्ट इब्निंग थी, और न्यूज़ रूम में आये हुए कुछ टाइम हुआ था खबर आई कि आई बी एन ७ न्यूज़ चैनल के मुंबई दफ्तर में हमला हुआ है और तोड़ फोड़ हुई है.....हमने भी खबर चलाई, विसुअल्स देख कर गुस्सा भी आया और तरस भी.....गुस्सा इसलिए क्यूंकि जिन लोगू ने हमला किया वे शिव सेना के बताये जा रहे हैं और एक राजनीतिक पार्टी इतनी गिर सकती है कभी सोचा नहीं था, अभी तक राज ठाकरे के गुंडे ऐसा करते थे लेकिन अब शिव सेना भी........खैर तरस इसलिए क्यूंकि जिस पार्टी के कर्यकर्ताऊ ने ऐसा किया उस पार्टी कि हालत का अंदाजा आप लगा सकता है अभी क्या होगा, चुनाव के बाद वो भूखे शेर कि तिलमिला उठी है और सत्ता कि भूख उसे कुछ भी करने को मजबूर करने को विवास कर रही है....निश्चित तौर पर यह हमला पूरी मीडिया पर था और इसकी जितनी भात्सना कि जाये कम है. यह आम जन कि आवाज पर हमला है.....पूरी मीडिया पर हमला है....शिव सेना कि तरह से इतनी नीच हरकत पर उतारू हो सकती है इसका जीता जाता उदाहरण था यह...लेकिन इस मामले में महारास्त्र सरकार भी कम दोषी नहीं है, उसने क्या किया इतने सालू में, राज ठाकरे जैसे लोगू को ढीला छोड़ कर कुछ कठोर कार्यवाही न कर वो अपने आप को सामने नहीं लाना चाहती , या फिर उसकी बस से बहार है....मुख्यमंत्री ने तो अभी कही दिया कठोर कारवाही करेंगे मगर इस कठोर कार्यवाही का अर्थ क्या होगा आने वाले दिन सामने लायेंगे....जिन मीडिया कर्मियौं को मारा पीटा है उनके साथ पूरा देश है.....और पत्रकार होने के नाते में भी निंदा करता हूँ. दूसरी बात नेगेटिव या पोसिटिव रिपोर्टिंग क्या होती है ये कोई पार्टी बताएगी क्या? हैरान करने वाली बात है....और बाल ठाकरे के जो मन में आये वो लिख देना सामना में वो अची बात है...उसमे किसी का कोई नुकशान नहीं होता है....आपको पूरी आज़ादी है कहने कि बोलने कि और प्रेस को नहीं....कुल मिलकर देखा जाये तो इस कदर लोकतंत्र में घटना होना शर्मनाक है.....इस हिसाब देखा जाए तो राज ठाकरे और बल ठाकरे में कोई फरक भी नहीं है..एक हिंदी भासी लोगू के खिलाफ है तो दूसरा मराठी का हितैषी बन ने कि फिराक में हाथ पैर मार मार रहा है...अगर यह शाबित हो गया कि हमला शिव सैनिकू ने किया है तो चुनाव आयोग को सख्त रवैया अपनाने चाहिये.....साथ हम्लावारू के खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी चाइये......कोई भी लोगू कि अभियक्ति को रोक नहीं सकता है.....और मीडिया लोगू कि अभिब्यक्ति का मजबूत साधन है.....साथ ही महारास्त्र सरकार को और जल्द और पारदर्शिता से काम कर ऐसी घटनाएं दुबारा न हो इस पर सोचना चैये.....