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रविवार, 27 जून 2010

साईना ने झटका इंडोनेशियन ताज...!

आंखिर साइना नेहवाल की मेहनत रंग लायी ....और बन गई इंडोनेशिया सुपर सिरीज़ की चैम्पियन...लगातार तीसरी जीत के साथ साइना विश्व में दूसरे नम्बर की खिलाड़ी बन गई हैं... इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज पर भी कब्जा कर लिया है।साइना नेहवाल ने जापान की साइना ने सयाका सातो को तीन सेट तक चले मुकाबले में 21-19,21-11 से हराया। इससे पहले साइना नेहवाल ने शनिवार को जापान की एरिको हिरोज को 21-9, 21-10 से हराया था। साइना ने इससे पहले सिंगापुर ओपन और घरेलू सरजमीं पर इंडियन ओपन ग्रांप्री में ट्रॉफी जीती थी।

इस खेल में इंडोनेसिया, जापान, चीन जैसे देश हमेसा दबदबा रहता था. पहली बार प्रकाश पादुकोण के बाद सायद कोई खिलाड़ी इतनी जोरदार तरीके से फॉर्म में दिखा है...वो साईना ही दिखी...टाइमिंग भी अच्छी थी...और पुरे विश्वास में दिखी पुरे मैच के दौरान....वहीं अब साइना टॉप रैंकिंग पर लक्ष बना कर खेलेंगी.....हमारी सुभकामना है वो जल्द इस मुकाम पर पहुचे...कहते हैं मेहनत एक दिन जरुर रंग लाती है....इरादा पका होना चाहिए...बस!

गुरुवार, 24 जून 2010

45 मिनट में तीन क़त्ल राजधानी में ...जिम्मेदार कौन?

आंखिर पकडे गए तिहरे हत्याकांड के आरोपी...मोनिका, कुलदीप, सोभा का कतला कर दिया था..पिछले दो तीन दिन से हम टीवी,अख़बार हर जगह दिल्ली के अशोक विहार में हुए तिहरे हत्याकांड के बारे में देखते, सुनते आये हैं. ये तीनों आरोपी फरार हैं. इन्हूने जान ले ली तीन लोगों की ....पुलिस ने पचास हज़ार का इनाम भी पटक डाला...और २४ जून को तीनों पकडे भी गए...गाज़ियाबाद के गढ़मुक्तेश्वर इलाके से...हम जो विसुअल्स देख रहे थे टीवी स्क्रीन पर उसमे अंकित कह रहा थाकि क़त्ल हमने नहीं किया...बाकी दोनु चुप थे...हमने तो टीवी पर देखा हमें तो कुछ नहीं मालूम,फंसाया जा रहा है.....सो ....सो...ये उसके बयान थे.

सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि अभी कुछ दिनों से ऐसा क्या हो गया कि सरकार,कोर्ट,और अपने को सामाजिक रूप से लिबरल कहने वाले लोगों के गले की फांस बन गया है मुद्दा . ओनर किल्लिंग के नाम पर मीडिया, सरकार,कोर्ट और अपने आप को लिबरल कहने वाले ठेकेदार लामबंद हो गए हैं. अचानक खाप पंचायत का विरोध होने लगा है. जहाँ खाप नहीं है वहां क़त्ल नहीं हो रहे हैं क्या? एक तरह सरकार पंचायाती राज लागू करने जा रही है और मजबूत करना चाहती है...दूसरा पंचायत के फैसलों को गलत बता रही है. सरकार कहती है कि पंचायत को मजबूत किया जायेगा....लोकल मुद्दे पंचायत में निपट जाए तो ठीक है....वहीं अब दो प्यार करने वाले अगर शादी कर लेते हैं या फिर एक गोत्र में शादी करते हैं तो उनका क़त्ल कर दिया जाता है..ऐसा क्योँ ? कुल मिलाकर सरकार का दोहरा चेहरा ? एक तरह विरोध वहीं दूसरी तरह समाज में जाने पर उनका समर्थन...क़त्ल पहले भी होते थे...प्रेमी जोड़े पहले भी भागते थे...सजा पहले भी दी जाती थी...खाप को पहले गैर जाट बहुल समाज जानता तक नहीं था...खाप की पंचायत होती थी मीडिया देखता भी नहीं था उसकी ओर...खाप तो चलो हरियाणा और कुछ उत्तर प्रदेश के हिस्से में देखने को मिलती है...वो भी जाट बहुल इलाकों में....लेकिन बाकी देश के अन्य हिस्से में भी तो लोग रहते हैं...वहां पर भी इस तरह के फैसले और सजा दी जाती है...उस पर कोई बवाल नहीं करता...सामाजिक रूप से कोई भी अपनी इज्ज़र नहीं खोना चाहेगा...और पश्चिमी सभ्यता अपनाने का आप विरोध करते हैं...कोई करे तो करे क्या...कुल मिलकार युवा पीढ़ी चौराहे पर खादी है...कोई उसे समझाने वाला नहीं है....इसका नतीजा भटकाव के रूप में देखा जा रहा है...और भयानक मंजार हमारे सामने है...अचानक क्या हो गया कि प्रेमियौं कि शामत आ गई....और एक के बाद एक प्रेमी जोड़े भागने लग गए....उनका क़त्ल होने लग गया...समाज में तरह तरह के नारे लगने लग गए कुछ पक्ष में कुछ विपक्ष में...दबे जुबान से नेता भी बोलने लग गए....

ये ऊपर तीन चेरे, युवा हैं पढ़े लिखे हैं, अच्छे घर के खाते पीते हैं, लेकिन क्या मिला ये सब कर के....जेल की चार दीवारी..कुछ करने, गुजरने की हसरत धरी रह गई...माता पिता,भाई बहन के लिए जिंदगी भर का दुःख..टैग लग गया इन पर 'कातिल' का वो भी एक नहीं दो नहीं तीन लोगों का कत्ल का.....लेकिन इस सबके लिए जिम्मेदार कौन था...क्या ये तीनों अकेले थे....या फिर घर वाले..या फिर हालात जो इन्हूने देखे...? किसी ने जानने की कोशिश नहीं की ....क़त्ल करना गलत है, था और करना भी नहीं चाहिए..लेकिन जब इंसान इंतना मजबूर हो गया, तीन लोगों का क़त्ल कर दिया तब कुछ न कुछ मजबूत कारण रहा होगा...वो क्या था किसी ने जानने के कोशिश नहीं की...और सरकार को यह बात समझनी होगी...नहीं तो आगे और भी भयानक नतीजे हो सकते हैं..समाज में उथल पुथल के लिए कोई और नहीं बल्कि खुद हम, सरकार जिम्मेदार हैं. सालों से गोत्र में शादी नहीं होती थी..अचानक विरोध होने लगा..की नहीं गोत्र नाम की चीज़ नहीं है..एक गाँव में शादी कर लो....तो फिर क्योँ भारत को संस्कृति वाला देश कहा जाता है ....बनाना क्या चाहते हैं इस देश को ....?हर चीज़ का हल होता है..इसलिए सरकार को समाज के साथ मिल बैठकर कोई ठोस नतीजे पर आना चाहिए....नहीं तो कोर्ट,सरकार और समाज आपस में सर फोड़ते रहेंगे.....और हल कुछ नहीं निकलना वाला...क्यूंकि यह मुद्दा किसी एक आदमी का नहीं बल्कि हर उस इंसान से जुदा है, धर्म से जुडा है वो संस्कृति के साथ जीना चाहता है...

अभी नेता दबी जबान से बोल तो रहे हैं लेकिन ब्याक्तिगत तौर उनसे पुचा जाये तो तो भी नहीं चाहते कोई बात समाज के खिलाफ जाए...फिर चाहे वो वोट बैंक कारण हो या फिर उनका पारिवारिक मामला....ऐसे ही हर इंसान पर लालू होता है...खाप पंचायत हिन्दू मैरीज एक्ट में संसोधन की मांग कर रहे हैं तो क्योँ नहीं सरकार उन्हें बुला लेती बातचीत के लिए ....आंखिर सरकार समाज,देश से ऊपर तो नहीं है...खाप जो इतने सालों से चलती आ रही हैं...उनको एक झटके में दरकिनार भी नहीं कर सकते...और अगर करोगे तो हम उसका मंजर रोज देख रहे हैं..आज वो प्रेमी जोड़ा मारा गया..आज वो भाग गया...सो- सो .... कोर्ट के ऊपर में टिपण्णी नहीं करना चाहता, लेकिन सरकार कदम उठाये तो हर चीज़ संभव है..नहीं तो क़त्ल तो और भी होंगे...कोई अपनी इज्ज़त समाज में ऐसे नहीं उछालना चाहेगा..कोई नहीं चाहेगा कि घर कि बहन बेटी या फिर बेटा कहीं और बिना बताये चला जाये या फिर ऐसा कर ले जो समाज को स्वीकार नहीं हो..शादी करना गलत नहीं है... आंखिर कोर्ट कितने प्रेमी जोड़ों को सुरक्ष्या दे पायेगा? और सरकार कितना विरोध कर पाती है या सपोर्ट कर पाती है उसकी भी लिमिट है मगर यह देखने वाली बात होगी...हल कुछ नहीं निकलने वाला....समाज को अगर विखरने से बचाना है तो सरकार,समाज और जो एनजीओ समाज के लिए काम कर रहे हैं वो सब मिल बैठकर बातचीत करें और उचित फैसला लें. जो समाज और देश के हक़ में हो...और आने वाले दिनों में इज्ज़त और नाम के खातिर समाज में किसी का क़त्ल न हो जिससे पढ़े लिखे युवा अपना जीवन गर्त में न डालें.....

वहीं इस केस में दिल्ली पुलिस की किरकिरी हुई है...क्रेडिट उत्तर प्रदेश की पुलिस ले गई......मसला दिल्ली का था और प्रेस कांफेरेंस लखनऊ से हो रही थी...और दिल्ली पुलिस टीवी पर देख कर अपने हाथ मॉल रही थी......कुल मिला कर सरकार को इस मसले पर बढे सोच समझ कर कोई हल निकालना चाहिए, समाज की भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए...किसी की हत्या करना बिलकुल गलत कदम है....लेकिन ऐसे नौबत ना आये इसके लिए समाज को जागरूक होने की जरुरत है...सरकार, समाज, पंचायत सभी को मिलकर बैठ कर कोई हल निकालना चाहिए...
कातिल पढ़े लिखे युवा थे, संपन्न घरों से ताल्लुक रखते थे, तीनों कातिल सब कुछ समझते थे, लेकिन अपने समाज और परिवार की खातिर तीन पढ़े लिखे लोगों का क़त्ल कर दिया गया.....चाहे पुलिस दे? या सरकार दे? या फिर गाँव की पंचायत? कहीं न कहीं कमीं तो जरुर है.... लेकिन जवाब तो समाज को देना ही होगा ..........


कश्मीरियत का जन्मदिन--वितस्तता मंदिर

वितस्तता मंदिर. अमन और कश्मीरियत का जन्मदिन...वितस्ता--दरिया झेलम का उल्लेख ऋग्वेद और महाभारत में भी मिलता है. कश्मीर का जीवन कहलाने वाले दरिया झेलम का पौराणिक नाम वितस्ता है. कश्मीरी पंडित इसे वितस्ता के नाम से पुकारते हैं. बेरीनाग जगह वितस्तता मंदिर. अमन और कश्मीरियत का जन्मदिन....भादों की तेरह तारिख अर्थात २४ सितम्बर कश्मीरी पंडित इसे वेथ फ़ारसी में इसे बेहत और यूनानी इसे हिर्दयादास पेश के नाम से पुकारते हैं

शुक्रवार, 11 जून 2010

फूटबाल महाकुम्भ २०१० शुरू ........



विश्व के सबसे पापुलर खेल फुटबाल के महाकुंभ का आगाज आज दक्षिण अफ्रीका में हुआ....इस मेले में विश्व भर की कुल ३२ टीम हिस्सा ले रही हैं....इससे पहले आज अफ्रीका महाद्वीप की संस्कृति में पूरी तरह यह कार्यक्रम अपने आप को मदमस्त करता हुआ दिखा...सिटी स्टेडियम में पांच विमानों के फ्लाईट पास्ट के साथ सुन्दर शुरुवात हुई.....३२ देश आपस में भिड़ेंगे......कौन इनमे से विजेता बनेगा ...यह आने वाले दिनों में पता चल सकेगा ...जब फाइनल में अंतिम दो टीम्स भिड़ेंगी...पूरा स्टेडियम आज बुबुजेला भौंपुवों से गूँज उठा....वहीं ब्राजील और स्पेन इसमें बेस्ट टीम मानी जा रही है.... लेकिन अभी यह कहना जल्द बाज़ी होगी....खेल में कुछ भी हो सकता है ....

लेकिन एक प्रश्न अपना देश भारत क्या कभी यहाँ तक पहुँच पायेगा ?


सोमवार, 7 जून 2010

भोपाल गैस त्रासिदी-सजा 25 साल बाद !

आंखिर मिल ही गई भोपाल गैस त्रासिदी के दोषियों को सजा वो भी 25 साल बाद....मगर पीड़ित 25 साल तक रोते रहे, झेलते रहे,पीड़ा सहते रहे, बहुत सारे स्वर्ग सिधार गए लेकिन न्याय नहीं मिला....जो मिला वो नाकाफी मिला.....
सदी की सबसे बडी औद्योगिक त्रासदी 'भोपाल गैस कांड' के मामले में सीजेएम कोर्ट ने आखिरकार 25 साल बाद सभी आठ दोषियों को दो साल की कैद की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर एक-एक लाख रूपए और यूनियन कार्बाइड इंडिया पर पांच लाख रूपए का जुर्माना ठोका गया है। सजा का ऎलान होने के बाद ही सभी दोषियों को 25-25 हजार रूपए के मुचलके पर जमानत भी दे दी गई। इससे पहले आज चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मोहन पी तिवारी की अदालत ने आठों आरोपियों को धारा 304 के तहत लापरवाही का दोषी करार दिया था।अदालत ने यूसीआईएल भोपाल के तत्कालीन चेयरमेन केशव महिन्द्रा, मैनेजिंग डायरेक्टर विजय गोखले, वाइस प्रेसिडेंट किशोर कामदार, वर्क्स मैनेजर जे मुकुंद, प्रोडक्शन मैनेजर एसपी चौधरी, प्लांट सुप्रीटेंडेंट केबी शेट्टी, प्रोडक्शन असिस्टेंट एसआई कुरैशी, आरबी रॉय चौधरी को दोषी करार दिया। यूनियन कार्बाइड के मालिक और मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन को भगोडा घोषित किया गया है। इसलिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया। वहीं आरबी रॉय चौधरी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।2-3 दिसम्बर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी जहरीली मिथाइल आइसो साइनाइट (एमआईसी) गैस ने हजारों लोगों की जाने ले ली थीं। दुनिया के औद्योगिक इतिहास की यह अब तक की सबसे बडी घटना मानी जाती है।

गैस पीडितों में आक्रोश
भोपाल जिला कोर्ट के बाहर सुबह से ही काफी तनाव था। मीडिया पीडित परिवारों को कोर्ट के अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। सुबह से पीडित परिवारों का कोर्ट के बाहर जमना शुरू हो गया था। आठों आरोपियों को दो साल कैद की सजा सुनाए जाने के बाद गैस पीडितों में भारी रोष है। वे सभी दोषियों को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। सरकार और सीबीआई दोनों को आडे हाथों लेते हुए गैस पीडितों ने जमकर नारे लगाए।

उन्होंने कहा कि हमारी लडाई आगे भी जारी रहेगी। कोर्ट के इस फैसले को लेकर अपीलकर्ता खुश नहीं हैं। एक तो 25 साल का इंतजार, ऊपर से हल्की धाराओं में आरोपों के साबित होने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई है। गैस पीडित कोर्ट रूम में प्रवेश पाने की अनुमति के लिए जिद पर अडे रहे और उन्होंने खूब हंगामा मचाया। गैस पीडित सजा के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जाएंगे।

ये हैं भोपाल के गुनहगार -

यूका के मालिक वारेन एंडरसन, यूसीआईएल भोपाल के चेयरमेन केशव महिन्द्रा, मैनेजिंग डायरेक्टर विजय गोखले, वाइस प्रेसिडेंट किशोर कामदार, वर्क्स मैनेजर जे मुकुंद, असिस्टेंड वर्क्स मैनेजर डॉ. आरबी रॉय चौधरी, प्रोडक्शन मैनेजर एसपी चौधरी, प्लांट सुप्रीटेंडेंट केबी शेट्टी, प्रोडक्शन असिस्टेंट एसआई कुरैशी सहित यूका कार्पोरेशन लि. यूएसए, यूसीसी ईस्टर्न इंडिया हांगकांग और यूका इंडिया लि. कोलकाता पर मुकदमा चल रहा है।

इनमें से मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन, यूका कार्पोरेशन लि. यूएसए और यूसीसी ईस्टर्न इंडिया हांगकांग फरार घोषित हैं। आरबी रॉय चौधरी की मौत हो चुकी है।
एक नजर :
1 दिसंबर 1987 में सीबाआई ने यूका के मालिक वॉरेन एण्डरसन के खिलाफ चार्ज शीट बनाई थी।
9 फरवरी 1989 में सीजेएम भोपाल द्वारा एण्डरसन की गिरफ्तारी के लिए गैर जामनती वारंट जारी किया था।
14 फरवरी 1989 में सीबीआई को यूनियन कर्बाइड की जांच की स्वीकृति यूएस प्रबंधन की ओर से मिली थी।
14 और 15 फरवरी 1989 में सुप्रीम कोर्ट से मुआवजा राशि देने का आदेश यूएस स्थित कंपनी को दिया गया था।
29 जून 2002 में एण्डरसन को सजा दिलाने में हुई देरी के लिए दिल्ली में भूख हडताल की गई।
28 अगस्त 2002 में सीजेएम भोपाल न्यायालय की ओर से एण्डरसन को यूएस से भारत आने के आदेश जारी।
6 फरवरी 2006 में केशव महेन्द्रा सहित दूसरे अभियुक्तों के बयान भोपाल कोर्ट में दाखिल हुए थे।
1 जून 2009 में सीजेएम भोपाल द्वारा एक बार फिर गैर जमानती वारंट जारी किया गया। इसमें सीबीआई से एण्डरसन को भोपाल अदालत में पेश करने की बात कही गई थी।
13 मई को सुनवाई पूरी हुई। इसमें अदालत ने 7 जून को फैसले की तारीख तय की।
[courtesy-rajasthan patrika]

बुधवार, 2 जून 2010

नो क्रिकेट........जेंटलमैन !

खेल मंत्री एम् एस गिल का यह कहना है कि क्रिकेट टीम को एशियन गेम में नहीं भेजा जाना चाहिए, अपने आप बहुत कुछ कहता है...जिस देश में क्रिकेट धर्म जैसा माना जाता हो...और जहाँ पर जनता इस खेल के प्रति इतनी सनकी हो कि कुछ भी करने को तैयार बैठी रहती है....वहां का खेल मंत्री का ऐसा बैयाँ आना देश के शर्म की बात है ....हालांकि उनका यह निजी बयान था. जब खेल मंत्री का दिल ही मान रहा है ऐसे में कुछ न कुछ बात तो जरुर है...एशियन गेम जैसे बड़े खेल के मेले में देश की प्रतिष्ठा का सवाल रहता है..हर देश का खिलाड़ी इस मेले में अपना जी जान लगा देता है...

खेल मंत्री का यह बयान वाकई इस खेल के प्रति निष्ठा और नियति पर सवालिया निशाँ खडा कर गया है . इसमें सट्टा, फरेब,खरीद फरोख्त होने से सायद वे भी दुखी हैं...उनको भी लगता है कहीं सट्टेबाजी का जिन्न या फिर अन्य परेशानी एशियन खेल में न आये.....बीसीसीआई उनके अन्दर नहीं है, नहीं तो शायद कबका मामला बिगड़ चुका होता ......आंखिर उन्हूने अपना पल्ला यह कर झाड दिया है कि बोर्ड क्या करेगा? ये फैसला उस पर छोड़ दिया है...लेकिन लगता है इस खेल के प्रति लोगों,अधिकारियौं और यहाँ तक सरकार का भी भरोसा उठने लग गया है...जिस हिसाब से पैसा इस खेल के रंग को रंगीन कर गया उससे तो यही लगता है आने वाले दिन इस खेल के लिए सरकार को कदम उठाना पड़ सकता है....और उठाना भी चाहिए क्यूंकि टीम्स की खरीद फरोख्त, पैसा फैंकने से देश के प्रति भावना कम हुई है और खेल को नुकशान हुआ है.....खेल कोई भी बुरा नहीं होता लेकिन जिस तरह से पिछले चंद वर्षों में इसमें इतनी तब्दीली आई है, उससे लगता है आने वाले दिन शुभ संकेत ले कर नहीं आने वाले हैं...हालत यह हो गई है लोगों को अब पता नहीं है खिलाड़ी कहाँ खेल रहा है और वो है कौन?