पृष्ठ

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

वादियाँ तेरा दामन......!

लगभग तीन सालों के बाद अपनों के बीच जाऊंगा.....कार्यालय से अवकास लिया है....शुक्रिया अपने बरिष्ठ सहयोगी अफसरान का ! में भी बिना काम के कोई छुट्टी नहीं लेता...छुट्टी के लिए जूठ बोलना मुझे गवारा नहीं है....खैर...लम्बी यात्रा करनी है॥कई जगह जाना है....कई लोगों से मिलना है...लेकिन अपने नाना-नानी मामा मामी, भाई बहनों के बीच जाना एक सुखद अहसाश है॥वादियाँ जो मुझे अच्छी लगती है....उनके बीच रहना किस्मत का फैसला मानता हूँ....प्रकर्ति के नजदीक रहना और वह फीलिंग्स अपने आप में एक अलग होती है...जहाँ मेरा बचपन बीता है॥जहाँ में पेड़ों से फल तोड़े हैं, जहाँ मैंने फूल के पौह्दे लगाए हैं...जहाँ मेड में चढ़ कर झूले का आनंद लिया है......जहाँ लोगों को प्रणाम कर सीखा..और ढेर सारा आशीर्वाद मिला..उन्ही लोगों के बीच फिर से जाना मेरे लिए एक ख़ुशी है....काम करते करते इंसान थक जाता है और बोरियत होने लगती है.... दिल्ली शहर जो किसी का नहीं है....न होगा...बस यहाँ इंसान पेट के लिए आता है......या फिर इलाज़ के लिए.....जगह जगह जाम , भीड़, त्रफ्फिक जाम...और पता नहीं क्या क्या ....लोग तो बस एक दुसरे को बेचने पर तुले हुए होते हैं..सीधे मुह कोई बोलता नहीं है....सोचा थोडा बदलाव हो जायेगा और में अपनों के बीच काफी सालों के बाद पह्चुन्गा....मेरा अपना बड़ा सा घर ..अपने लोग...जहाँ सिर्फ प्यार ही प्यार है......!जल्द लौटूंगा....उसी भीड़ भरी जिंदगी में...आपके बीच...........!

आपका अपना
एम्एस

बुधवार, 25 अगस्त 2010

एक सुंदरी हीरा चोर, दूसरी बनी मिस यूनिवर्स ..!


२३ अगस्त और २४ अगस्त को दो बड़ी ख़बरें भारत के साथ अन्यदा देशों में भी चर्चा की केंद्र बिंदु रही...हर सख्स के जबान, और ज़हन पर छायी रही....जैसे ही लोगों ने टेलिविज़न चैनल खोले और सुबह का अखबार उठाया तो देखा की दो सुन्दरियौं ने अपने देश का नाम दो अलग-अलग अंदाज में रोशन किया....एक ने चोरी कर और दुसरे ने हुश्न की मल्लिका बन कर....पर दोनू ही सुंदरियां मैक्सिको जैसे रंगीले,चटकीले और उदार देश की रहने वाली थी....एक बनी मिस यूनिवर्स दूसरी बन बैठी शातिर हीरा चोर ...एक ने हीरे चोरी कर नाम कमाया दूसरी ने सुन्दरता और दिमाग के साथ दुनिया में अपना लोहा मनवाया...खैर....हीरे चोरी वाली मजेदार बात लगती है...इसलिए इस पर बात करते हैं....

औधोगिक नगरी मुंबई में पर्दर्शनी चल रही थी.....वो भी गोरे गाँव मेन...मुंबई होंक-कोंग की कंपनी के हीरे थे..बेचारे बेचने के लिए और दिखाने के लिए लाये थे यहाँ पर......कहते हैं इंडिया में हर गली में एक चोर मिल जायेगा....वही हालत यहाँ पर भी हुई...कर दिए हीरे पार...इतनी सख्त सुरक्ष्या के बावजूद ऐसा कर पाना वो भी एक नहीं 73 डब्बे ......अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में नुमाइश के लिए रखे गए 6.6 करोड़ रुपये कीमत के हीरे फ़िल्मी अंदाज में उड़ा डाले....सब धुवां- धुवां कर फुर्र हो गए....इन महारानी के साथ चार मुस्टंडे भी थे..वो भी दुबई में धरे गए....बताये जाते हैं अब कब इंडिया आते हैं देखना होगा....हमारी पुलिस लगी होगी अब कागज़ काले करने में....इससे बढ़िया होता उनके लिए जब वे चाहते तो बच निकलते.....अगर इंडिया से नहीं निकलते.....क्यूंकि यहाँ तो धरमशाला है न?....जो भी आये स्वागत है....मेहमान हैं जी अपने !फिर चाहे संसद में हमला कर दे या फिर किसी बाज़ार में....मौत का मंज़र देखने को मिले ... ख़बरों के अनुसार जो पकडे गए हैं,, इनकी पहचान एलिवा ग्रिसेल (24),यही सुंदरी है..... कैंपोस मोलान एलियास (39), गोंजलेज मैडलोनैंडो (24) (तीनों मेक्सिको के) और वेनेजुएला के ग्युटिरेज ऑर्लैंडो के रूप में की गई है....पुलिस ने तलाशी के बाद सीसीटीवी कैमरों की रेकॉर्डिग में 1500 चेहरों में से इन चारों को शक के घेरे में पाया। लेकिन तब तक मेक्सिकन सुंदरी अपने तीनों साथियों के साथ नौ दो ग्यारह हो चुकी थी...यह तो हुई हीरे चोर की गाथा...

दूसरी सुंदरी सच में सुन्दर है....दिखने में,बोलने में,चलने में..वैसे मैंने नहीं देखी उसकी चाल ...लेकिन ठीक ही होगी तभी तो सुंदरी बनी है...और भी बहुत कुछ में होगी...मगर सुन्दर है चेहरे पर बिना क्रीम पावडर पोते इसमें नो शक !.....वो इसलिए क्यूंकि दिमागी प्रश्न सायद इसमें काफी कुछ अहमियत रखता है....खैर अय्याश शहर के नाम से जाने वाला नवेदा...लास वेगास में हुए रंगारंग समारोह में मेक्सिको की जिमेना नवारेत्ती के सर में छोटा सा मुकुट रख दिया गया...और बन बैठी मिस यूनिवर्स ! वहीं मिस जमैका, येंदी फिलिप्स को फर्स्ट रनरअप और मिस ऑस्ट्रेलिया, जेसिनता कैम्पबेल को सेकंड रनरअप चुना गया है....मतलब दूसरी और तीसरी....! हमारे मुल्क की भी एक सुंदरी गई थी...सायद विदेशी पानी राज नहीं आया...और पंद्रह सुन्दरियौं में भी जगह नहीं बना पाई...अब उसके लिए मुश्किल यह है कि नाटकों में रोल मिल पाते हैं या नहीं ....कुल मिलाकर दो सुंदरी दोनू मक्सिको की....फर्क सिर्फ इतना है एक सुंदरी जेल में क़ैद में और दूसरी ब्रह्माण्ड में घूमेगी.......!

रविवार, 22 अगस्त 2010

भगवान् दर्शन को गए, लेकिन भगवान् सन्डे मनाने गए..!

हम भगवान् के दर्शन के लिए गए... लेकिन दर्शन नहीं हुए....वाह रे नसीब वालो ....भगवान् भी रविवार होने के कारण विश्राम कर रहे थे.. .और हमें दर्शन नहीं दिए... मगर सबसे बड़ी बात.... हम उदास नहीं हुए बल्कि प्रण कर के आये कि फिर आयेंगे और दर्शन कर के जायेंगे........फिर किसी दिन भगवान् मिलन की भयानक योजना अमल में लायी जाएगी......योजना कार के अन्दर बनेगी.....ड्राइव करते हुए क्यूंकि अमूनन वही हमारी बातचीत करने की सबसे अच्छी और महफूज जगह होती है...और सकूँ से हम ड्राइव करते-करते देश दुनिया प़र तर्क वितर्क,ख़बरों की चीड-फाड़ कर इस नवाबी,अंग्रेजी,और मुगलाई शहर के साथ हमराह होते हुए कार्यालय तक पहुच जाते हैं....चलो सोचा आपके साथ भी शेयर करूँ....

मसला शुरू होता है महिपाल पुर जैसी जगह से...जो हवाई अड्डे के सामने हैं....और मेरे घर के रास्ते में पड़ता है...मेरे दोस्त मंदीप के भी... दोनों की शिफ्ट एक है दोनों पत्रकार बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं...योगिंदर पंडित जी की कुटिया तो वहीं पर है जन्मजात.....!हमारे वहां काबिल ग्राफिक डिज़ाईनर है...हम तीनों महिपाल पुर में मिले...मंदीप बोला यार गाडी गढ़े में गिर गई थी...और वो दिन मंदीप का उसी के नाम शहीद हो गया था, ऑफिस नहीं पाया...शुक्र है पी के नहीं चला रहा था.... वैसेपीता बड़ा अच्छा है ....मगर आप हसना मत !

नंबर प्लेट गड्ढे के कब्र में दफ़न हो गई है....अब वो नयी बनवानी है..जय हो एमसीडी की...जय हो गड्ढे की...वो इसलिए की एक दिन की छुट्टी तो मिली...योगिंदर को बोल रखा है वो बनवा के रखेगा, लगवा कर चल पड़ेंगे..लेकिन महिपालपुर पहुचे... तीनों मिले भी ..नंबर प्लेट नहीं मिली...पंडित जी को समय नहीं मिला...और हमें लगवानी पड़ी....लगवाई वो भी...रास्ते में रविवार होने की वजह से ट्राफिक भी कम था...ऑफिस के नजदीक पहुचे तो हमारे पास पूरे पैन्तालीश मिनट थे...मंदीप बोला चल कहीं चलते हैं टाइम बचा है ....उसे पहले ऑफिस के अन्दर जाना पसंद नहीं है...सर में दर्द हो जाता है...कारण कई हैं...वो जानता है या में जानता हूँ....तीन बजे की ड्यूटी है........तीनों बजे उंगली लगाने के चक्कर में आराम-आराम से ऑफिस जा रहे थे...लेकिन हमारे पास ४५ मिनट बाकी थे... और मंदीप बोला चल कही चलते हैं...टाइम है अभी...मैंने आईडिया दिया इस्कोन मंदिर चलते हैं...दिल्ली में इकलौता मंदिर है..और सुना है भगवान् वहां पर अंग्रेजी में बोलते हैं...विश्व प्रसिद्ध भी है...बड़ा मन कर रहा था देखने को काफी सालों से...पिछले सालों में हज़ार चक्कर काट चूका हूँगा मंदिर के आगे पीछे... मगर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका..लगता है भगवान् ज्यादा ही नाराज़ हैं..सोचा नजदीक भी है... और में भी कभी पहली बार दर्शन कर के आऊंगा ..भगवान् के दर्शन भी हो जायेंगे..वह भी नहीं गया था...पंडित जी परिवार वाले हुए इसलिए वो पहले हाथ मार आये थे..और हमारे लिए अच्छा भी था.....कोई तो होगा जो रास्ता बतायेगा....लवर बॉय के दर्शन करने को .....! गया तो पहले तो सोचना पड़ा कि कहाँ कार पार्क की जाए?..मुश्किल से पार्किंग ढूंढी...क्यूंकि रविवार होने की वजह से ज्यादातर जगह खाली थी....हम भी कम नहीं थे सीधे गाडी ले गए ऊपर पहाड़ जैसी जगह पर जहाँ पार्किंग के लिए पर्ची काटने वाला प्राणी भी नहीं था...कार खडी की...मंदीप साहब ने कार की इतनी बार कटाई कर दी...में भी हैरान ...ये कर क्या रहा है..टेढ़ी, मेधी, सीधे,तिकोना, वो कोना..सब ! कोई कोना नहीं छोड़ा हाई ने.....अंडी आदमी है! [हरयाणवी में अंडी का मतलब जबरदस्त,झक्कास]...

खैर ढूँढा भगवान् का द्वार.. .मैंने पूछा कहाँ मिलेंगे भगवान् ?पंडितजी ने कहा नीचे ...मैंने सोचा नीचे तो पातळ लोक होता है ..फिर भी गए तो गेट पर काली मूर्ति थी...फिर सोचा क् कृष्ण भगवान् इतने काले तो नहीं थे...इंसान ने बना दिए होंगे...उनको नमस्ते की ! फिर आगे चले गए..देखा बाएं हाथ एक रेस्टोरेंट...! लंच, डिन्नर,नास्ता सब...पानी, नमकीन,मिठाई सब अन्दर मिलता था..लिखा तो था...अन्दर नहीं गए....सामने क्या...?एक चोटी नुमा आदमी सफ़ेद धोती पैजामा में बैठा....सामने उसने सीसे के घर के छोटे से अन्दर तीन लड्डू रखे हैं..एक मोतीचूर का...एक नारियल और एक पता नहीं काला काला जैसा था...आगे लिखा था प्रसादम ! देख के ऊपर चले गए...एक काली टी शर्ट में युवक आया ...बोला भगवान् बंद हैं...चार बजे आना...! ओए ये क्या...किस्मत...?वह बोला मुजियम देख लो....गुस्सा बहुत आया ..और भगवत गीता सुनायेंगे...हम कहाँ भगवत गीता सुनने वाले थे..ध्याड़ी पर जो जाना था, वहां की गीता कौन सुनेगा...उसने सोचा लफंगे, आवारा हैं ये.....क्या पता था कि उसे ये दोनू प्रताड़ित पत्रकार हैं....और एक लाइन मारने वाला ग्राफिक्स डिजाइनर !

खैर...में बोला हम अन्दर नहीं जायेंगे..बाहर से भगवान् के दर्शन करेंगे...और वहीं भगवान् भी दिख गए हमें...स्विमिंग पूल में खड़े थे ...बड़ा सा अजगर हाथ में लिए हुए..हाथ जोड़े...और खड़े रहे..उनके चरणों में पानी के अन्दर सीमेंट की सतह पर खूब सारे सिक्के थे...भक्तों ने अर्पण किये होंगे..जय श्री कृष्ण!!!!!!!!!फिर फैसला हुआ वापस चला जाये...ऑफिस के लिए देरी हो जाएगी...मंदीप को बोला में... यार रेस्टोरेंट ठीक लग रहा है यही आया करेंगे खाने ...देशी अडंगा नाले के किनारे खाने से तो यहाँ ठीक लग रहा है...गन्दा भी खायेंगे तो भगवान् ठीक कर देंगे...पंडित जी की शिकायत की बहुत बोलता हूँ, बहुत बोलता हूँ...रिपोर्टर जो ठहरे...में भी लड़ू की तह तक जाने की कोशिश में लगा हुआ था... फिर किसी और दिन कोशिश करेंगे....जाने की वहां पर...वहीं आये तीन लड्डू वाले के पास..तर्क वितर्क के साथ हमने तीस रुपये के तीन लाड्डो सहीद कर दिए ...तीनों ने टेस्ट किये...एक दूसरे के मुह देख कर....और आ गए वापस...पार्किंग में...वहां पर देखा कंचे वाला खड़ा है...तीन ग्लास बनवाये....भगवान् के नाम पर ! कंचे वाली पीने में बड़ा मज़ा आया....मीठी नमकीन...और खट्टी....अंत में सब कुछ खा पी कर बिना दर्शन करे वापस ऑफिस...फैसला हुआ फिर जायेंगे..और दर्शन कर के आयेंगे....! जय श्री कृष्णा......!

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

हाय रे बीमारी मार जात है......!

कहते हैं इंसान को 'बीमार' नहीं होना चाहिए .......मगर इंसान कितना भी सुरक्षित रहे, कितनी भी सुरक्षा में रहे... उसे बीमार होने से कोई नहीं रोक सकता है...कोई रोज़ बीमार होता है तो कोई महीने में, कोई साल में तो कोई उम्र में एक बार....और कोई तो बीमारी के साथ ही इस धरती में जन्म लेता है ...जैसा अमूमन आजकल के बच्चों के साथ हो रहा है...कुल मिलाकर बीमारी इंसान को झकझोर देती है...और इंसान को कुछ करने-फिरने की हालत में नहीं छोडती है.....कोई बड़ी बीमारी होती है तो कोई छोटी बीमारी...कोई बीमारी फायदा उठाने के नाम पर बीमार पड़ता है तो कोई अचानक बीमार हो पड़ता है....कमाल की चीज़ है यह बीमारी....!

मेरी भी मुलाकात 'बिमारी' के साथ हुई ....दिन बुधवार, मेरा साप्ताहिक अवकास ! घर पर था...सोचा सोऊंगा देर में उठूँगा..लेकिन माता जी को यह याद नहीं था ...और ग्यारह बजे उठा डाला मुझे..ऑफिस नहीं जाना ? फिर थोड़ी देर में मोबाइल ने भी अपनी घंट मार कर ड्यूटी पूरी कर डाली....खैर..ममी को सूचित किया आज ऑफ है...शायद ममी जी को भी शायद सकून पंहुचा.. चलो कभी तो घर पर रहेगा यह लड़का...! लेकिन हालत ठीक नहीं लग रही थी..मंगल वार को भी हालत ठीक नहीं थी..ऐसे ही बुझे दिल से न्यूज़ रूम में डेस्क पर काम करने में लग्न रहा...खबर कोई इतनी बड़ी नहीं थी..बस एक पकिस्तान में बम्ब फटा था...नेता के परखचे उड़ गए थे..बाकी कश्मीर तो धधक ही रहा था..अमित शाह वाला केस करवटें बदल रहा था...इसलिए यही बड़ी ख़बरें थी.....बारह बजे सो कर उठा....पापा आये और ३ कागज मेरे कमरे के टेबल पर पटक कर चले गए....फरमान जारी हुआ...ये बिल भर के आना..दो घरों के बिजली के और एक पानी का ....कुल मिलाकर २०००-३००० हज़ार रुपये का अवकाश मना मेरा ....मैंने दर्द के साथ बड़ी मुश्किल से कहा भर दूंगा पापा ....बाकी मेरी हालात की किसी को फिक्र नहीं....कहते हैं न 'गरीब की बहु सबकी भाभी.... ' ममी को करवट बदलते हुए बताया मेरी हालत ठीक नहीं है...ममी ने पूछा क्या हुआ....मैंने कहा पेचिस ! वो समझ गई और मेरे लिए कुछ ऐसा बनाने के लिए चल दी जो इसमें फायदे मंद होता है....फिर देखा थोड़ी देर में पेट में ज्वार भाटा उठने लगा....फिर छोटे ऑफिस की ओर भागा....ऐसा कई बार हुआ जब तक घर पर था..फिर सोचा चल यार बिल भर के आता हूँ...बाज़ार आया तो पैसे निकाले और बिल भर के दोनूं ऑफिस में वापस भारद्वाज जी के ऑफिस में आया.......मैंने सोचा शायद ठीक हो जाऊंगा लेकिन नहीं हुआ !

शाम को ऑफिस फोन किया....अपने बरिष्ठ को की शायद में वीरवर को नहीं आ पाऊंगा...मेरी हालत पतली है...खाना भी पतला, और निकल भी पतला ही रहा था....इसलिए सोचा डॉक्टर के पास तो जाना ही पड़ेगा.....अजीब बिडम्बना है बीमार होने पर एक डॉक्टर ही ऐसा है जो खुश रहता है और उम्मीद करता है की लोग ज्यादा से ज्यादा बीमार होने चाहिए...खैर रात भर हालत पतली ही रही...एक महिला मित्र से बात हुई, वो अपने मामले के कारण परेशान थी....मगर मेरी अच्छी मित्र थी इसलिए बात कर ली..मामला सुलझ गया उसका....वो तो खुश....मगर अपनी हालत फिर पतली....बीमारी जो घुशी पड़ी थी....खैर जैसे- तैसे रात काटी...सुबह उठा तो अंकल को फोन किया....अंकल ऐसा हो गया है और आप कहा हो? अंकल ने कहा आ जा और चलते हैं डॉक्टर के पास....!

गया भारद्वाज जी के ऑफिस में ..वहां अंकल मिले....गए उनके जानकार डॉक्टर के पास...मेरे साथ गुरु जी और अभियंता साहब दर्शन जी भी गए....कुल मिलाकर दल बल के साथ चल दिए हम ..खुद हम बीमारी का कुछ नहीं कर सकते हैं...लेकिन डॉक्टर के पास हम चारों गए.....पिछली गली में ही डॉक्टर टुटेजा जी का अभुत्पुर्ब क्लिनिक था....अभूत्पुर्ब इसलिए उसके आगे पीछे इंसान को खुश करने की चीज़ों की दुकाने थी ...बोले तो साइकल झूले....खिलोने....और बीच में टुटेजा जी की क्लिनिक ...सुई घुसोते रहते हैं मरीजों को ...वाह रे इंडिया ! क्या जगह है क्या काम है..............!
जैसे मेरी पतली हालत थी....वैसे ही डॉक्टर वाली गली पतली....कोई पीछे से स्कूटर वाला होर्न मरता तो कभी साइकल की घंटी बजती...कभी खिलोने वाली महिला देखती की कही उसके ग्राहक तो नहीं.....कभी कोई और सामने से टकरा जाता...खैर डॉक्टर क्लिनिक के गेट के अन्दर घुसे,,,देखा कुछ महिलाए कुछ बच्चे और कुछ पुरुष....सब हाल के बेंच में कतार से बैठे हुए हैं.....सब बीमार हैं...! नम्बर आने का इंतज़ार कर रहे हैं...अंकल सीधे अन्दर गए..एम् अधेड़ उम्र की महिला कुर्सी में बैठी हुई थी..और अंकल को देख कर १000 वाट की मुस्कराहट के साथ उसने स्वागत किया.....!अंकल ने कहा मारीज साथ में है डॉक्टर को सूचित कर दो....नाम मनोजीत बताया...!थोड़ी देर तक हम चारों उस महिला के साथ गुफ्तगू में ब्यस्त थे...मुद्दा बीमारी नहीं थी.........बल्कि वहां पर भी हाई रे महंगाई..!खैर कोई नर्स पीछे खडी , कोई दायें कोई बाए कमरे में....कोई मरीजों को चेक अप कर रही थी....मगर अधिकतर नर्स मोबाइल में मेसेज या फिर गेम में मशगूल थी...सुई के बजाये मोबाइल देख कर उनके हाथों में अच्छा लगा ...!काल आई l मनोजीत ..गए हम चारों ....! उन्हूने मेरा परिचय कराया ...डॉक्टर से...! शक्ल परिचय कराने जैसी नहीं थी...डॉक्टर भी सोच रहा होगा .....जूठ है या सच ...?पत्रकार लगता तो नहीं शक्ल से...डॉक्टर ने पूछा... क्या हुआ...मैंने कहा डिस -इंट्री ....! वो बोला चलो अन्दर लेट जाओ ... अन्दर गया तो बिस्तर में लेटा और डॉक्टर ने टी शर्ट ऊपर कर पेट को दो तीन बार दबाया..और कहा इन्फेक्सन है..! सायद ठीक कह रहा था..!टेबल पर वापस गए और पूछा कैसे क्या हुआ...कोई दवाई तो नहीं ली?...उसने दवाई लिखी.....और पर्चा हाथ में पकड़ा दिया....बाहर आये तो केमिस्ट साहब भी इंतज़ार में बैठे थे...परचा उनके हाथ में पकडाया...और भुगतान भी किया ....उसने बताया दिन में दो बार खानी है....और लाल, सफ़ेद रंग की गोली दे पटकी ......फिर वापस हम भारद्वाज जी के ओफ्फिस में आ गए.....लेकिन सबसे बड़ी बात बिना बात का पंगा....! बीमारी ने कैसे कैसे गलियाँ दिखा दी....कैसे कैसे लोगों से रूबरू करवा दिया.....! है न बीमारी अजीब...फिर क्योँ न कहें हम... हाय रे बीमारी मार जात है .......!