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बुधवार, 29 अगस्त 2012

हुक्का, हुक्का नहीं है.....बल्कि बहुत कुछ है !

 
 
हुक्के का भी अपना अंदाज है, इज्ज़त और रूतबा है...किसी को हुक्का ना पिलाओ तो मुश्किल और किसी को पिला दो तो आफ़त..अब यह आपको चुनना है, कब किसे और कहाँ हुक्का पिलाना है...बीडी,आज तक किसी की हो नहीं पाई ...और सिगरेट किसी को अपना नहीं पाया..लेकिन जितनी इज्जत हुक्के को मिली समाज में...खासकर उत्तर भारतीय समाज में उतनी इंसान को भी नहीं मिल पाई ..इस हुक्के की गुडगुडाहट ने ऐसी हुंकार भरी की आज कई जगह 'हुक्का बार' तक खुल बैठे हैं...लोग कह रहे हैं अगर धुएं को उडाना है, तो फिक्र के साथ क्यों उड़ायें, बल्कि खुसी साथ उडाओं ..आज सुबह उठ कर अपने पुराने मित्र के घर पर गया तो ये नज़ारा दिखा...उसकी की एक छोटी सी झलक आपके लिए ...

यमुना नाला नहीं नदी दिख रही है !


देश=भारत, राजधानी इसकी दिल्ली, और दिल्ली में इकलौती यमुना नदी, यमुना नदी अगस्त के महीने कैसी दिखी उसकी एक झलक आपके सामने पेश कर रहा हूँ..अपने मोबाइल से ली गई तस्वीर मेट्रो के अंदर से ...अधिकतर लोग यमुना नदी को देख कर और उसके बारे में बातें
करने पर नकारात्मक बोलते हैं....क्यूंकि नदी नहीं बल्कि यह काला नाला दिखता है..लेकिन इस महीने यह काला नहीं एक नदी दिख रही थी...मीडिया चिल्ला रहा है, अटकलें लगा रहा है बाढ़ आ जाएगी ये हो जायेगा वो हो जायेगा...पानी का लेवल इतना हो गया उतना हो गया...लेकिन सच बताऊँ इस बहते हुए पानी देखना अच्छा लग रहा है..असल में नदी का यही स्वरुप है,यही मिजाज़ है...सचमुच यमुना इन दिनों हर्ष से प्रफुल्लित होगी...इसी को नदी कहते हैं...शुक्रिया ! मॉनसून का जो नाले को नदी का रूप दे रहा है हर साल..बेशक कुछ दिनों के लिए ही सही ...नहीं तो साल में यमुना नदी नाला ज्यादा नदी कम दिखाई पड़ती है..!

बुधवार, 22 अगस्त 2012

एक था अजीब टाइगर .....!



गलती से 'एक था टाइगर' देखने की ज़हमत उठा बैठा ! जब अपने मित्र के साथ पिक्चर हाल के अन्दर घुसा तो आधे घंटे की फिल्म सरक चुकी थी...सीन में विदेशी हिंदी-लैस बाला कैटरीना कैफ और आधुनिक बुजुर्ग सलमान खान रसोई घर के अन्दर आपस में गुफ्तगू करने में लगे हुए थे...लेकिन पूरी फिल्म देखी जिस पर फिल्म आधारित थी, उन दोनू का मिक्सचर जूस बनाकर प्रोडूसर और निर्देशक दोनों बेशर्मी से गटक गए, RAW और ISI अगर ऐसे ही काम करते रहे, या करते होंगे, या करते हैं तो हिन्दुस्तान और पकिस्तान दोनू आतंकिओं के ढोल पर मातम मना रहे होंगे...शर्म की बात है ! फिल्म बनानी भी है इतने सम्बेदनशील मुद्दे पर तो थोडा तो ठीक दिखा देते....अंत में 'एक था टाइगर' का अता पता भी नहीं चला है कहाँ है ...इससे अच्छा तो हमारे कॉर्बेट पार्क के टाइगर अच्छे हैं जो शिकार होने के बाद उनका शव तो मिल ही जाता है....फिल्म में सलमान से अच्छा अभिनय कैटरीना ने किया है...अगर यह लड़की हिंदी बोलना सीख गई तो कुछ सालों में बोलीवुड का काफी माल समेट ले जायेगी ! आप पैसा कितना ही कमा लें , कुल मिलाकर RAW और ISI की यह इकलौती प्रेम कहानी गले से नहीं उतरी !