शुक्रवार, 26 दिसंबर 2008

पाकिस्तान:- झूठ बोले कौवा काटे


हमारे पड़ोसी देश पकिस्तान को आज़ाद हुए लगभग ६० साल हो गए हैं लेकिन आज़ादी से आज तक उसने भारत के नाक में दम कर रखा है, चाहे वो राजनीतिक बयान बाज़ी हो, दिपक्षीय वार्ता हो, या फ़िर किसी अन्य बात पर अपना पक्ष रखने की बात. मौका देखकर पलटने में वहा के हुक्मरान समय जाया नही करते . पाकिस्तान का बयान बाज़ी का स्तर बहुत ही निम्न स्तर का रहा साथ ही बहुत गैर जिम्मेदाराना बयाहार रहा है। पाकिस्तान में राजनीतिक नेत्रत्व हमेशा से ही हाशिये पर रहा है इसमे कोई शक की कोई गुंजाईश नही है।
इतनी जल्दी और तत्परता वह अन्य चीजू में नही लगाता जितनी भारत के साथ आपसी विचार विमर्श, कूटनीतिक सम्बंद्हू की बातू पर. लेकिन अहम् बात यह है की आज के समय में जब राजनीतिक के बयानू को अन्तराष्ट्रीय पटल पर बड़े ध्यान से सुना जाता हो या लिखा जाता ह. ऐसे में जब सुचना तंत्र के युग में ये बाते बहुत महत्वा रखती है. पहले ऐसा नही होता था. महीनू आम जनता तक पहुचने में लग जाते थे तब तक उस बात का कोई अर्थ नही रह जाता था. पाकिस्तान की हालत हमेशा से दुबिधा से पीड़ित मरीज़ की तरह रही है और यह वह ख़ुद भी अची तरह जनता है. प्रधानमन्त्री और रास्त्रपति दोनू ही अलग अलग बयान जारी करते हैं. भूत्पूर्ब प्रधानमन्त्री ,अन्य जनरल के बयान अलग होते हैं. ऐसे में प्रश्न यह उठता है माने तो किसकी माने और प्रमुख बात क्या माने. इस लिए उसकी हर बात पर प्रश्न चिन्ह लगा रहता है. अभी कुछ दिनू पहले की बात है भुत्पूर्ब प्रधानमन्त्री नवाज़ शरीफ ने माना की कस्साब पाकिस्तानी है और अबुसके दो दिन बाद बयान आता है की नही ऐसा नही है. कत्तार्पंधियौं और सेना के दबाव में आकर से ऐसा कर बैठे. आई एस आई चीफ को भारत भेजने के मामले में भी ऐसा ही हुआ. ऐसे में इन लोगू पर कितना यह्कीन किया जाए. जो देश की बागडोर सँभालने की बात करते हैं, उनका यह हाल है. छोटे बचू की तरह अपने बयानू को कुछ ही पल में बदल डालते हैं.
सबसे बड़ी समस्या वह सेना की रही है फ़िर भी कत्तार्पन्थियौं जो अब सीधे सरकार पर हावी हो रहे है. सेना की वह एक तरह से सरकार चलती है. और सेना आधे से ज्यादा फैसले ख़ुद तय करती है. सबसे बड़ी बात और ख़ास यह है की सेना पकिस्तान की विदेश नीति तय करती है. हुकूमत या आम जनता तो सिर्फ़ मूकदर्शक बनी रहती है. सेना के फैसले हमेसा कठिन और ताना तनी वाले होते हैं. सेना हमेसा युद्ध की सोचती है. वैसे भी वह की सेना ४ बार मार खा चुकी है हमसे. इसी बौखलाहट में वो आज तक है. वह क्योँ भूलेगी उस मार को. नतीजा यह रहा की परोक्ष युद्ध थोरा हुआ है उसने. आई एस आई और अन्य जिहादी गुट जैसे लश्कर,जैश,इख्वान,ज़माद उल दावा हो या अन्य कोई गुट सब एक जबान बोलते हैं वो है जिहाद. यह जिहाद पता नही कौन से किताब में लिखा है की निर्दोष निह्ठे लोगू को कत्ले आम कर दो. उनकी रोज़ी रोटी इसी से चलती आई है । भारत के ख़िलाफ़ कम करने में वह पर उनको शाबाशी और ईनाम दिया जाता है. इस तरह की हर्कतू कर वो अन्तराष्ट्रीय पटल पर अपनी कई दफा बेईज्ज़ती करवा चुका है. मगर बेशर्मी की हद होती है जो पकिस्तान और उसके हुक्मारानू, सेना पर लागू कटाई नहिः होती है. वह की आवाम भी जानती है इस तथ्य को लेकिंग वो क्या करे ? आज तक वह की आवाम कत्तार्पन्थियौं, सेना,पुलिस की डर से खुलकर सामने नही आ पाई है.
बयानबाजी या कोई बक्ताब्या सरकार की तरह से आने पर उसका एक महत्व होता है. एक एक सब्द के टोल कर बोला जाता है. उसका एक मतलब होता है. एक शब्द कई लोगू के दिमाग की उपज होती है तब जाकर वह नेता तक पंहुचा है. अंत में नेता के विवेक पर आधारित होता हाही की कितना तोडे-मरोड़े उस बयान को. अधिकतर यही होता है. जो लिखा गया हो या "ब्रीफ" किया गया हो उसी को वो बोले. लेकिन पकिस्तान के हुक्मरानू के बीच ऐसा कुछ नही दीखता. खासकर भारत के साथ सम्बंद्हू को लेकर वह बिल्कुल भी भरोसेमंद नही रहा. इन सब चीजू से आपसी बिश्वास पर शक की निगाह रहती है. जिसकी कोई दावा नही होती है. अमेरिका उसको पूरी कोचिंग देता है बयान बाज़ी की कोचिंग क्योँ नही देता है. उसने अपना उल्लू सीधा कर लिया अपनी सेना को वह पर उत्तारकर. आतंकवाद के नाम पर वो किसी भी देश में घुश जाता है लेकिन अपनी जरूरातू को पुरा करने के लिए. इराक़ ,अफगानिस्तान,वियतनाम में हम उसे देख चुके हैं. वह के हुक्मरान सेना और आई एस आई के अधिकार्यौं से घिरे रहते हैं. कोई रस्त्राध्यक्ष आएगा तो हमारे देश में कुछ और भाषा बोलता है और वह जाकर कुछ और बोलता है पता नही कौन सा मंत्र पढ़ते हैं जो ऐसा जो जाता है. कुल मिलाकर बयान बाज़ी बहुत ही निचले स्तर की रही है पकिस्तान की. आज की पढ़ी लिखी आवाम को समझना चाहिए की उनके लिए क्या जरूरी है क्या नही और ऐसे हुक्मारानू को सबक सिखाना चाहिए । क्यूंकि सब अमन और विकास चाहते हैं खून खराबा नही. ..

गुरुवार, 25 दिसंबर 2008

“BREAD PAKODA-:I know how to make it now”

December 25th, year 2008, Day Thursday. Holy day X-Mas is being celebrated in all over the world. Nice festival. Touchy day for everyone. I had off on previous night. So I got the time to wake up early in the morning. It was around 4 o clock I guess… after that I tried to enter famous room of any home Rosoi Ghar alias Kitchen to have some blast there. I know how to make Tea but not the special one, Aumlate only boiled one not another mixture type. Today I thought to make a different . as I feel cooking is an art itself. Suddenly I felt there should be male oriented dish. That is none other than ‘Bread Pakoda’. Ooops look at this name Bread=which is important for any human being and Pakoda=don’t know the meaning but I guess its male name not female. As I cook to enjoy. Hey here not involvement of female ok…? Cooking a female is other business…ha ha ha but I shares this with my ‘shore lass’. She was laughing in installments like ha aha he ahha ha. Jab male cooking karte hain to female aise hee hastee hai I guess…isn’t? any way finally I was inside kitchen to have some Bread Pakoda. I had seen to making Bread Pakoda before to mama, Halwaee or some where else many times. So like butcher I took knife and cut 5-10 pieces of bread in Triangle shape. But the question in my mind was ringing why we cutting in triangle mode why in round or in square or any other mathematical symbol. Which I don’t know much as my “GANIT” or Math is always under cover. I got ‘0’aka zero out of 100. which is really provable for me. You know why? Because my teacher always used to tell me you got “Anda” Murgi ka Anda and now cook & have it. And I liked Andaa always. Its realy tasty and healthy for the body. Egg created special respect inky mind so when ever I got the ‘Andaas in class I was happy that at least no one got it except me its means its unique. Which always in my mind. Due to that Andaa I stopped thinking much. And I got oil in to pan in which boiling immensely. I put one piece of two cut bread pieces in the liquid of pulse meal with spices fully and put in the pan. And you know, it was fantastic Art I guess… I made around 20 pieces which were enough for family members. In between my mom was with me, she taught how to put , pour and cook… but my younger kin did not like and he perfectly deny to have it and gone outside. My father was also not happy with this great process. Only my mom was taking interest with me in this great making of Bread Pakoda. But I don’t care all these…things. I know very well what to do , how to do. I enjoy in every thing making good. Infact cooking is not in my list of hobbies. Bu its part of home activity so I respect it. In the last I made around 14-15 bread Pakodas. And you know they were superb, smart, beautiful, elegant, energetic and sexy food. Ooops isn’t? yes it is…I served to Grand Maa, Mama, Papa with other stuff. Unfortunately not for my self. I had 3 or 4 pieces of simple bread with milk and tea but not Bread Pakodas. Because I am suffering from cough and neck pain. So this was my first date with Bread Pakoda and finally I made it successfully for others not for myself…….





बुधवार, 17 दिसंबर 2008

एथिकल हाकिंग पर कोर्स.....


New course has been offered which is part of todays computer technology.As day by day demand is increasing of Computer solution and hacking. Course on “ethical hacking” has been offered in United Kingdom. Course is offering members of the public the chance to learn how to become a professional computer hacker - without ever leaving the house.
The lessons in so-called “ethical hacking,” which is used by internet security companies to counter computer crime, are being offered as a distance learning course by the International Correspondence School.
Ethical hackers — also known as “white hats” — focus on understanding the methods used by criminals, and test computer systems for weaknesses that could leave them open to attack. They often conduct dummy raids and penetration tests to discover the security of a client’s system.
Students will be taught a number of skills, including how to run denial-of-service attacks and the tricks of social engineering often used by hackers — as well as being shown how to create viruses.

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

बुश को जूता क्योँ मारा ......

एक ऐसे देश का राष्ट्रपति जो अपने आप को सुपर पॉवर की संज्ञा देता हो,एक ऐसा देश जो बिश्व में अपना बर्चास्वा कायम करना चाहता हो, और जिसको देख कर दूसरे देश अपना आदर्श मानते हो कई चीजौं में,जिसने अपनी ताकत की वजह से अर्थ्ब्यावास्था को कंट्रोल कर रखा है,जो जब चाहे किसी देश पर बात मनवाने का प्रेशर दल सकता है...कुल मिलकर बिश्व का सबसे बड़ा ताकत वर देश अमेरिका. उस देश के राष्ट्रपति के ऊपर अगर ऐसे कोई जूते फैक के मारे और वो देखता ही रह जाए. चाहे मजबूरी हो या लाचारी आख़िर जूते तो लग ही गए. इस कदर सोचा भी नही होगा उन्हूने की बेआबरू हो कर निकलेंगे. जूते भी उस देश में जहा पर अपनी भर पुर दादा गिरी दिखाई और वो भी आम जनता में नही बल्कि प्रधान मंत्री के सामने. इस प्रक्रिया में दूसरा जूता प्रधान मंत्री के हातू को भी छु कर गया...क्यूंकि वो मेहमान राष्ट्रपति को बचने की कोसिस कर रहे थे और करते भी क्योँ नही...आख़िर वो सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति जो हैं.....और आप जब वो भाषण दे रहे होऊं तो आप खड़े नही रह सकते इसी का फायेदा तथाखातित पत्रकार ने उठाया....खैर जूता मारा भी पत्रकार ने. हिम्मत है उस सख्स की जिसने ये हिमाकत की. पता कब से और कितने गुस्से में वो जल रहा होगा...जब ये वाकिया हुआ में रात्रि शिफ्ट में था और जैसे ही ख़बर आई विसुअल की मांग होने लगी. और हमने विसुअल भी दे दिए. और इतिहास के पन्नू में ये घटना बिना रंग के लिखी गयी. क्यूंकि वही इराकी जूते सद्दाम हुसैन की सत्ता गिरते समय दूसरे थे और आज वही इराकी जूते उससे इंसान को जूते मार रही थी जिसने कभी सद्दाम हुसैन की मूर्ति को जूते मरने को बिबस कर दिया था बुत था जो भावनाए दूसरी जो बदली. इसलिए कहते हैं वक्त का पता नही कब क्या हो जाए और ये कोई गारंटी नही की आप शक्तिशाली हैं तो आप सुरक्षित हैं...कभी और कही भी हो सकता है. कहा गई सीक्रेट सर्विस कहा गई वो अमेरिकन पुलिस जो राष्ट्रपति को किले की खातिर घेर के रखती थी. ...दूसरा जूता मरने तक वह उसके पास कोई नही आ पाया..और बुश को कहना पड़ा की ऐसे लोग अपना ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसी हरकते करने से नही चुकते हैं. और साइज़ भी बता दिया बुश ने वो भी परफेक्ट १०. मगर ये उनको ही पता है की जूते खाना कितने फक्र की बात है. वो भी इस कदर. ..बिदाई के सब्दौं के साथ.

सोमवार, 15 दिसंबर 2008

Unscheduled visit of British PM Gordon Brown….

British PM suddenly visited India & Pakistan and shows his anguish towards Pakistan over the terrorism acts which are being operated by there. But its clear message to Pakistan now. Pakistan to has to take positive step against the ultras. World knows who is going to spread and from where they are being hutched. Brown said ‘75% Terror Attacks In UK Linked To Qaida, Pakistan’ which is very important as far terrorism is concerned. But the question why Pakistan makes pretend to defend from the world. Even, Over three-fourths of terrorist attacks investigated in the UK had al-Qaida and Pakistan links, British prime minister Gordon Brown said during a whistlestop tour of India and Pakistan on Sunday. His comment became the latest blow to Pakistan which is trying hard to distance itself from the Mumbai attacks. After meeting PM Manmohan Singh, Brown said, “The group responsible for the attacks is LeT and they have a great deal to answer for.” After Indian he went to Islamabad, he launched a $9 million counter-terrorism programme there with Pakistan. Brown also told Pakistan that it was time for action, not words. He asked both countries to let British investigators question terror suspects. In India, he asked for British investigators to be given access to Ajmal Amir Kasab. UK investigators have already been given a great degree of access to the probe. Whatever but its for the world now to do some thing for paksitan. And its good time for India as well to pressurized the Pakistan internationally. Because no one wants to listen this word of “Terrorism” .

रविवार, 14 दिसंबर 2008

मिस वर्ल्ड मिस रशिया चुनी गई और मिस इंडिया पारवती ताज से एक कदम दूर रही..aउर अब उनका कहना है की जूरी का फैसला ग़लत था....देखा जाए तो मिस वर्ल्ड पेजेंट हमेसा से विवादस्पद रहा है, चाहे वो रैंप पर गिरने का मामला हो या फ़िर ग़लत पर्तियोगी का चुनने का मामला हो....कभी कभी तो सम्बंद्हू को टाक पर रख कर खिताब पर कब्जा करने की

गुरुवार, 11 दिसंबर 2008

ये आपको भी पता होना चाहिए

You should know it……

This is the story about four people named EVERYBODY, SOMEBODY, ANYBODY & NOBODY. There was an important job to be done and everybody was sure that somebody would do it. Anybody could have done it, but Nobody did it.
Somebody got angry about that, because it was everybody’s job and Everybody thought that Anybody would do it. But Nobody realized that Everybody would not do it. It ended up with Everybody blaming Somebody, when actually no body accused ANYBODY….

बुधवार, 10 दिसंबर 2008

दोनू मुल्कू के आवाम को लड़ना होगा अपने हुक्मरानों के ख़िलाफ़...


मुंबई में हालिया हमले में पाकिस्तान के हाथ होने की जो बात सामने आ रही हैं उसमे कोई शक की गुंजाइश नही रह गई है,और उसकी नियत क्या रही है क्या होगी इस पर भी शक किसी को नही है। सारा विश्व जानता है कौन किसने क्या किया?लेकिन इस हमले ने एक बात साबित कर दी वो है लोगू का गुस्सा ! जो खुलकर सड़क पर उतर आया. लोग अपने घर से निकलने से पहले ये सोचने लगते हैं की जाए या न जाए, और चले गए तो क्या वे सुरक्षित हैं? दुष्यंत कुमार की गजल का शेर याद आ रहा है ...
"इस शहर में कोई बारात हो या बारदात
अब किसी भी बात पर खुलती नही हैं खिड़कियाँ"
इस सबका नतीजा ये देखने को मिला की हमारे सुरक्स्य के जिम्मेवार राज्नीतिग्यौं को तुंरत हटाना पड़ा. मुख्या - मंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री तक को बदलना पड़ा. वही पाकिस्तान के ऊपर इंटरनेशनल प्रेशर की वजह से दिन प्रतिदिन वो अपना स्टेटमेंट बदल रहा है. इससे साबित होता है उसकी कारगुजारी किस तरह की है.लेकिन एक बात है वो है दोनू देश के आवाम अमन चैन चाहती है. कुछ लोग हैं जो ऐसा कर अपनी राजनीतिक रोटिया शेक रहे हैं. वही पाकिस्तान के लिए यह एक अच मौका भी है कट्टर पंथियौं के ख़िलाफ़ करवाई करने का. वही उसे आतंकवाद मामले में भारत के साथ हाथ मिलाकर, कंधे से कन्धा मिलाकर चलना चाहिए. ये दोनू देश के लिए फायदे मंद होगा. युद्ध में शामिल होना आक के हालत को देखकर ठीक नही होगा. क्यौकी दोनु देश परमाणु संपन्न देश हैं। ...
ये चार पंकितियाँ मैंने तहसीन मुनव्वर जी के "बेसाख्ता" में पढ़ी थी जो आ आज के लिहाज से ठीक प्रतीत होती है...क्यूंकि दोनु देशौं की आवाम अपने हुक्मरानू से परेशान है...


"तुम भी हो मुसीबत में, हम भी हैं मुसीबत में,

तुम जीते हो दहशत में, हम जीते हैं दहशत में,

मिल-जुल कर लड़े आओ, नफरत के जुनूनी से,

तुम अपनी हुकूमत में, हम अपनी हुकूमत में।

इस चुनाव ने कांग्रेस और भा ज पा दोनु की हवा निकाली है....


इस चुनाव ने कांग्रेस और भा ज पा दोनू की हवा निकाली है....

पाँच राज्यौं के चुनाव रिजल्ट पर गौर करे तो राजनीती के दो धुरंदर डालू कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी कल इए यह एक सेमीफाइनल नही बल्कि नींद से जागने का अलार्म था. कौन क्या होगा? कसी होगा? ये आने वाले दिनू में दिखाई देगा. रही बात लोकसभा चुनाव की तो पाँच राज्यौं से जो ७३ लोकसभा सीटू के माई - बाप तो बन सकते हैं परन्तु पुरी लोकसभा का आईना होंगे इसमे शक की पुरी गुन्जाईस है लोकतंत्र में चुनाव होना अची बात है, और उससे अच्छी बात है राजीन्तिक डालू और नेतू का जनता के प्रति जवाबदेह होना।

एक बात देखने को मिली राजधानी दिल्ली में जैसे कयास लगाये जा रहे थे उसके बिपरीत चुनाव रिजल्ट आए. इससे साफ़ झलकता हाही लोगू ने कार्य को बोट दिया है न की मुद्दू को. रही बात लहर की तो इससे न तो कांग्रेस की राष्ट्रब्याप लहर पैदा हुई है न ही भारतीय जनता पार्टी की. यहाँ पर कांग्रेस को थोड़ा जोश मिला है तो भारतीय जनता पार्टी का अतिविश्वास होना उसी को झटका दे गया. सही कहे तो दोनू डालू की हालत पसीने पसीने जैसी हो राखी है वो भी राजधानी के इस शर्दी के मौसम में. कुल मिलाकर देखे तो छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से बेहतर काम किया है और इसका फल चुनाव में देखने को भी मिला वही दिल्ली में विकास काफी हुआ मगर बाहरी इलाकू को छोड़कर. अब देखना यह है की शील सरकार कितना ध्यान भाहरी इलाकू में लगाती है. वही मिजोरम में जोरम ठंगा को सत्ता से बहार कर फ़िर से जनता ने विकास न कर पाने की सजा दी है. सही कहे तो जनता का या फ़ैसला लोकतंत्र के लिए अहम् साबित होगा. (इंग्लिश से हिन्दी कन्वर्टर प्रयोग करने की वजह से कुछ गलतिया हैं इसलिए माफ़ी चाहूँगा)

रविवार, 23 नवंबर 2008

महान पिता की महान बात बेटे के लिए...



अमेरिका के मशहूर राष्ट्र पति अब्राहम लिंकन ने अपने बेटे के टीचर से लैटर के द्वारा बात की वो भी महान अंदाज में ....


अमेरिका के महान और राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अपने बेटे के हेडमास्टर को एक चिठी लिखी थी । काफी साल बाद भी एक पिता की सलाह आज उतनी ही खरी है, जितनी कल थी, लैटर कुछ इस तरह से था....


"उसे बहुत कुछ सीखना है। में जानता हूँ की सभी इंसान इमानदार और सच्चे नही होते हैं , लेकिन हो सके तो उसे किताबू के जादू के बारे में सिखाइए । इसके अलावा हो सके तो उसे चीजौं के बारे में सोचने का वक्त भी दीजिये, ताकि पंछियू के आस्मां में उड़ान भरने, मधुमखियौं के धुप में थिरकने और हरे भरे वादियू पर फूल के खिलने के रहस्यौं पर सोच सके। स्कूल में उसे सिखाइए की धोखा देने से असफल होना अच्छा है। भले ही दुनिया उसके बिचारू को ग़लत बताये, लेकिन वह अपने सोच पर भरोसा रखना सीखे। उसे विनम्र लोगूँ के साथ विनम्रता और सख्त इन्सानू के साथ सख्ती करना सिखाइए । उसे इतनी ताक़त दीजिये की वह लकीर का फकीर होकर भीड़ के साथ न चल पड़े। उसे सिखाइए की वह सबकी बाते सुने लेकिन उन्हें सच की कौसौटी पर कसे और केवल सही चीजौं को ही मंजूर करे। उसे सिखाइए की कैसे दुःख में भी हंसा जाता है...की आंसू अगर बहे तो उसमे कोई शर्म नहीं है। उसे सिखाइए की सनकी लोगूँ को झिड़क दे और बहुत मीठी-मीठी बातू से सावधान रहे। अपनी ताक़त और दिमाग की ऊंची कीमत तो लगाये, लेकिन अपने दिल और आत्मा का सौदा न करे। उसे सिखाइए की अगर उसे लगता है की वह सही है तो सामने खड़ी हुई चीखती भीड़ को अनसुना कर दे। उसके साथ नरमी से पेश आइये, लेकिन हमेशा गले से लगाकर मत रखिये क्यूंकि आग में टाप कर ही लोहा फौलाद बनता है।
उसे इतना बहादुर बनाइये की वह आवाज उठा सके, इतना धैर्यवान बनाइये की बहादुरी दिखा सके । उसे ख़ुद में भरोसा करना सिखाइए, ताकि वह इंसानियत में भरोसा रख सके। मेरी उम्मीदे ढेर सारी हैं, देखते हैं की आप क्या कर सकते हैं। मेरा बेटा एक अच्छा बच्चा है । "
.....अब्राम लिंकन .....

सौजन्य से आलोक भदौरिया

इंसान की ऐसी क़द्र के लिए जिम्मेदार कौन?

क्या इंसान ने जन्म लेकर गुनाह किया ? मानवता कहा रहः गई? ऐसी हालत के लिए कौन जिम्मेदार है?हमें विश्व में इस मामले पर एक होकर बैठकर सोचना होगा की कम से कम हर एक इंसान को पेट भर खाना तो मिले ....
ये आप ऊपर जो फोटोग्राफ देख रहे हैं इसे विश्व का सबसे ख्याति प्राप्त इनाम मिल चुका है । जिसे पुलित्ज़र इनाम कहा जाता है और जिसने ये फोटोग्राफ खीची है उनका नाम है केविन कार्टर ।ये फोटोग्राफ सूडान देश की है जहा पर १९९३ में आकाल पड़ गया था और उसी अकाल के प्रभाव के कारन हमें ऐसी हालत देखनी पड़ी है॥ पीछे बैठे
गिद्ध बच्चे के मरने का इंतज़ार कर रहा है जिससे वो उसे नोच- नोच कर खा सके...
इससे भी बड़ी दुखद बात ये है की श्रीमान केविन कार्टर के फोटो खीचने के ३ महीने के उपरांत उन्हूने दुखी हो कर डिप्रेशन के कारन आत्मा हत्या कर ली....दिल को झकझोर देने वाले इस मसले से इंसान को सबक लेने की जरूरत है , और जल्द कोई ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत है । आख़िर इस दुनिया में जीने का सबको अधिकार है.......

गुरुवार, 20 नवंबर 2008

आधुनिक समुद्री लूटेरे







आधुनिक समुद्री लूटेरे समुद्री लूटेरे जो न सिर्फ़ एक खतरनाक खेल खेलते हैं बल्कि ये अन्तराष्ट्रीय गिरोह का खास हिस्सा भी रहे हैं. पिछले कुछ दिनू से हम इन पैरेट्स के बारे में सुनते आ रहे हैं और पढ़ते आ रहे हैं और ये भी सुना की ये लोग सोमालिया के रहने वाले हैं...जिनके पास अत्याधुनिक हथियार और कुछ छोटी छोटी नाव हैं, सोमालिया एक ऐसा देश जो १९६० में इटली से आजाद हुआ और अफ्रीका एक हिस्सा बना....अभी सरकार के नाम पर वह पर सिर्फ़ टी फ जी यानि त्रंजिस्नल फेडरल गवर्नमेंट नाम का कमजोर संघठन है जिसने अपने आप को सरकार घोषित किया हुआ है...और ऐसे ही कई हिस्से इस देश के अलग अलग गैंग के इशारे पर अपना वजूद बचाए रखे हुए हैं...अब ये छोटे छोटे गैंग विश्व के लिए खतरा बनते जा रहे हैं.. क्यूंकि हर देश के ब्यापारी जहाज़ अदेन की खड़ी से गुजरते हैं कोई तेल तो कोई खाना या अन्य चीज़िएँ ले जाते हैं, और जैसा की हमने सुना और देखा समुद्री जहाजू को ये लूट रहे हैं और फ़िर फिरौती के रूप में मोटा पैसा ले कर छोड़ते हैं...जो न सिर्फ़ उस देश के लिए खतरनाक है बल्कि आने वाले दिनू में और अधिक विश्व व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं...अभी विश्व का सबसे बड़ा तेल टेंकर इनके कब्जे में हैं. अदन के खादी में ये सब खतरनाक खेल इनके द्वारा खेला जा रहा है...इनको पता है पानी में इन्स्सन बच तो सकता नही इसलिए मजबूरन इनको मुह मागी फिरौती मिल जायेगी...पिछले कुछ दिनू स्ताल्ट वेस्सेल बड़ी मुश्किल से इनके चंगुल से मोटी रकम दे कर छूटने में कामयाब हुआ था इसमे काफी भारतीय थे....इन लूतेरोउन को जल्द नही रोका गया तो ये आने वाले समय में और खतरनाक हो सकते हैं......

मंगलवार, 18 नवंबर 2008

बदले-बदले से राजधानी दिल्ली के गांव


बदले-बदले से राजधानी के गांव
राष्ट्रीय राजधानी के वो गांव जिंहूने इतिहास बनते बिगड़ते कई बार देखा है . बदलाव व विकास दोनू इ गावौं को एक नया रूप दे गया . गांव का स्मरण करते ही जहाँ मन में बिभिन्न प्रकार की यादें घर कर लेती हैं। वहीँ आज इन गावौं को गांव की नज़र से देखें तो सब बदला-बदला सा लगता है. मन का ये समय चक्र किसी को नही बख्सता है. परन्तु इन गावौं की सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक व नैतिक हालत आज "परिवर्तन की चौपाल" में बेबस खड़ी है. चौपाल सूनी है । दूसरी नज़र से देखे तो यह यूवाऊ व ताश खेलने वालौं का अड्डा बन चुकी है. वही इन गावौं में नीम और कीकर के पेड़ ढूंढें से नही मिलते. लोगौं का पहनावा बदल गया है, पहले परम्परावादी लिबास पहना जाता था. अब शायद ही कोई पहन कर खुश है. राजधानी का इलाका होने का खामियाजा भी इन गावौं को भुगतना पड़ता है.. विकास के साथ भयानक बदलाव जो देखने को मिल रहा है उससे आने वाली पीढी इनके बारे में किताबो में पढेगी . पहले लोगौं के पास पैसा नही था. अब इतना पैसा आ गया है की लोग गांव से पलायन कर कस्बू में आशियाना ढूंढते फ़िर रहे हैं... कभी समय था बेटी और ज़मीन को बेचने वाला नही मिलता था, आज उल्टा हो रहा है
लोग जमीन के पैसे से सबसे पहले कोठी बंगला और गाड़ी लेते हैं. एक समय था खाने को दो वक्त की रोटी पसीना बहाकर मिलती थी वही आज फास्ट फ़ूड व जंक फ़ूड ने गांव को जकड लिया है. गांव में जाती संप्रदाय का नाम सब लेते हैं लेकंग लेकिन बाहर आकर वही इंसान जाती संप्रदाय को भूल जाते हैं. दो प्रकार की स्थिति नही होनी चाहिए समाज में । सबसे दुखद यह है ki पिछले कई वर्षौं से gaoun का स्वरुप बदला तो hai , परन्तु shikshya को अगर देखे तो कुछ खास बदलाव nahi आया है. अभी भी gaoun में शिक्षया का level बहुत नीचे है. यह halat सोचनीय है. लोगौं का दिमाग अब business में दौड़ने लग गया है. लड़कियौं की तादाद gaoun में और भी कम हो रही है. इसका उदहारण आप हरियाण जैसे राज्य को ले सकते हैं जो न केवल राजधानी से लगा हुआ है बल्कि इस राज्य की आर्थिक हालत utni ख़राब नही है जितनी doosre rajyoun की । सामाजिक रहन सहन, खाना paan काफी बदल चुका ई. कुछ हौज़ खास, पिलंजी , तिहाड़ आदि जो famous तो है, परंतू waha पर gaoun का का vyavsaee karan हो चुका है . यही हाल देहात का भी हो रहा है. यहाँ पर ज़मीन की आसमान chootee कीमते गांव वालौं को बहुत कुछ सोचने पर mazboor कर रही अं.
इन gaoun का भोला भला इंसान आज chatur और चटक बन चुका है. आने वाले समय में यही ज़मीन की कीमत इन gaounoo को ग्रामीण परिवेश से काफी दूर ले जा सकता है. आज विश्व में भारत की पहचान महात्मा गाँधी , ताजमहल और गरीबी के sath sath तेज़ी से विकास करते हुए इस देश के औद्योगिकीकरण के karan भी हो रही है . हमारे देश में लोग इस बात से सायद सहमत न होऊं पर ये सच बात है की अभी भी हम gareebee रेखा को poori तरह पार नही कर सके हैं. राजीनेतिक समीकरण इन gaoun का जाती और संप्रदाय तक सीमित रहा ना की विकास पर आज तक वो भी दल सत्ता में आया वही "लुभावने नारे और वायदे" कर चला गया. राजधानी में बहार के लोग आकर राज कर चले गए. इन गौण की अपनी राजनीती ख़तम नही हो पाती है. चुनाव मके समय पर इनको जाती संप्रदाय याद आ जाता है. महात्मा गाँधी ने कहा था की भारत गौण में बसता है अरथां यह देस गौण की मिलिल उली संस्कृति का वाट वृक्ष्य है. आधुनिक विचारधारा व वैस्वी कारन के कारन गांव में जो बदलाव देखने को मिल रहे हैं उस उसे आने वाली पीढी एक नै मिश्रित संस्कृत से भरपूर होगी. गौण के विकास की बात सब कहते हैं लेकिन कार्य रूप में नही . गो में जाने पर कोठी बंगले देखने को मिलते इं. ग्रामीण परिवेश, रहन सहन कम देखते को मिलता है. हिंसा, द्वेष, जलन की बू आज इन गौण से आ रही है. यही हाल रहा तो थोड़े समय में गांव अपना अस्तित्व पुरी तरह मिटा चुके होंगे और अपना वजूद तलासते फिरेंगे. इसलिए गौण की धरोहर, संस्कृति और ताबा बना को बचाए रक्खने केलिए राजधानी शेत्रोउन के इन गौण को देश के अन्य गौण के लिए एक रोल मॉडल बनना चैये ताकि वे भी कुछ सीख सके और हम अपनेग्रामीण स्वरुप को संभल कर रख sake।

मंगलवार, 11 नवंबर 2008

हाई रे औडी तेरे क्या कहने....


भारतीय बाज़ार में ऑडी नाम की एक करोड़ पति गाड़ी का पर्दार्पण हुआ है, इसको आर ८ का नाम दिया है,ये नाम क्योँ दिया मुझ जैसे कम दिमाग के इंसान के लिए समझना मुश्किल ही नही खतरनाक भी है,अब ये मत पूछियेगा क्योँ और कैसे? खैर आ गई आख़िर एक करोड़ और १९ लाख के आस पास की यह अजीब गाड़ी. कभी मौका मिलेगा तो जरूर बठेंगे इसमे एक बार , आपको क्या लगता है क्या होना चिये इसके अन्दर जो यह इतनी महँगी है, मेरे हिसाब से रसोई घर, टॉयलेट ,बाथरूम, और ड्राइंग रूम तो होना ही चैये मेरे ख्याल से स्वीमिंग पूल भी हो तो बड़ी बात नही है...है ना? जो भी हो भारत जैसे गरीब और विकासशील देश में इतनी महँगी गाड़ी आ गई और आने के बाद क्या रंग खिलाती है ये करोड़ पति आने वाला समय ही बताएगा. एक तरफ़ बेचारी लखटकिया है जो टाटा अंकल लाने में लगे हुए हैं अब तक नही आ पाई, लोग माथे पर हाथ लगाये इंतजार में बठे हैं . इस कार को स्पोर्ट्स कार कहा गया है, अब कौन खिलाड़ी खेलेगा इसके साथ और कौन से खेल के साथ भविष्य ही तय करेगा. बताया गया की १५ कार तो पहले ही बेच चुके हैं. २० कार बेचने का अगले साल टारगेट है. खैर एक बात जरुर है वो ये की दिल्ली प्रशिध ट्रैफिक जरूर इसकी चुम्मा जरूर लेगी ये हमें यकीन है, नही तो सरकार को ऐसे कार के लिए अलग रोड तो बनानी ही पड़ेगी ,. वरना कोई न कोई पप्पी तो जरूर लेगा और इसका डेंट पेंट तो आप अंदाजा लगा ही सकते हैं कितना खास होगा...देन्टर कम से कम १ लाख तो छूने का लेगा ही, देखना ये है की कौन लक्की होगा वो जो इस काम को अंजाम देगा....फ़िर भी बेस्ट ऑफ़ लक्क तो कह ही देते हैं....

रविवार, 9 नवंबर 2008

ख़ुद जाना पड़ता है.....


प्यासा ख़ुद कुंवे के पास जाता है...


गांधीवादी कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्रा की कविता के अंश....
"घटनाये, हम तक आयें,इससे अछा है कि हम घटनाओं तक जाए"

हर काम का समय होता है......



नफरत और प्यार का भी समय होता है...इंसान जिंदगी में बहुत कुछ करता है,कुछ वो याद कर पता है, रख पता है और कुछ वो ऐसे भूल जाता है की जैसे उसने कभी किया ही नही हो, फ़िर भी कई बार इंसान पता होते हुए भी गलती कर बैठता है, और भागता रहता है भीड़ भरे दुनिया में,उसे ये नही पता होता है की हर काम का समय होता है...


बाइबल में भी कहा गया है...
हर काम का मौसम होता है...
हर काम स्वर्ग में तय होता है ,
जीने का और मरने का समय होता है,
बोने का और काटने का भी समय होता है,
ढहाने और बनाने का समय होता है,
रोने और हसने का भी समय होता है,
नाचने और शोक का भी समय होता है,
पत्थर और समेटने का समय होता है,
हताशा का और आशा का समय होता है,
रखने का और फैंकने का समय होता है,
आन्शुऊ का भी और संभलने का भी समय होता है,
रहने का और खुल के कहने का समय होता है,
नफरत का और प्यार भी समय होता है......

रविवार, 2 नवंबर 2008

खुदा का शुक्र है....जान बची...!!


३ नवम्बर की रात तकरीबन रात के ११ बजे जब घर पर ड्राईवर आया और बोला साहब चलिए गाड़ी आ गई है ऑफिस नही चलना क्या आज ? हम बोले चल रहे हैं भाई लेकिन कुछ देर चलने के बाद रास्ते में ही अचानक एक नई नवेली स्कार्प कार ने पीछे से हमारी गाड़ी को टक्कर मार दी। फ़िर क्या था हम तो पीछे सीट में बैठे थे, हमें अचानक से जोर का झटका लगा और पल भर में ही हम ऊपर नीचे हो गए, halat ऐसी हो गई जैसे किसी ने ankh कान और dimag सब fuse कर दिया हो, और हमारे ऊपर ड्राईवर pandey जी बाबु बाबु जी करते हुए...हमारे दोनु मोबाइल ऐसे बिछडे जैसे मेले में दो यार...खैर आनन् फानन में हम पीछे की तरफ़ के सीसे से baahar निकले जो ki गाड़ी ३ palti खा कर उलटी हो चुकी थी और शुक्र है खुदा का की humme से किसी को कोई khas चोट नही लगी, लेकिन वो जनाब अपनी बीबी दो bachoun के साथ kali kalooti नई नवेली कार में रात के १२ baze night driving पर nikle houn उनको salaam करने को jee करता है। और कार जो की केवल २० दिन पहले रोड पर आई थी, ऐसे चला रहे थे जैसे वही हैं नम्बर एक फोर्मुलारा driver ! khair bahar निकले हाल कुशल poocha सबने और नफा नुकशान नापा फ़िर चले आए ऑफिस ...सभी ने poocha लगी तो नही ? हमने ने कहा लगी थी वो भी अक्ल की, डेल्ही में रोड में चलते हुए इंसान का कुछ नही पता भाई कब क्या हो जाए....बस बचना था किस्मत me आज सो bachi गए warna हो गया kalyan ...इसके लिए इश्वर का धन्यवाद....

आखिर कुंबले को क्योँ नही मिला वो सम्मान...

भारतीय क्रिकेट टीम का महान खिलाड़ी अनिल कुंबले
क्रिकेट के इतिहास के पन्ने से एक महान खिलाड़ी का अंत हो गया...अब हमें ऐसे खिलाड़ी का खेल अंतररास्ट्रीय स्तर पर देखने को नही मिलेगा जिसने अपनी निष्ठां , परिश्रम, और ईमानदारी से देश की सेवा की है....आश्चर्य यह है की क्योँ ऐसे खिलाड़ी को वो दर्जा नही मिल सका जिसने इतनी म्हणत से देश की सेवा की हो....और डर है कही वो आने वाले टाइम में उतना याद न किया जाए जितना सचिन,गावस्कर या फ़िर कपिल किए जाते हैं...कुंबले की कमी भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत बड़ी खाई है, इसे भर पाना इतना आसान नही है, जो पिछले १८ साल से भरी हुई थी। हमें ऐसे महान खिलाड़ी को सलाम करना चाहिए.......

Дели: правительство Индии вводит запрет на 59 китайских приложений, включая работу Tiktok в Индии, в том числе UC Brozer

-Collab на Facebook может заменить Tik Tok, может скоро запустить Collab в Индии -Решение заставило китайские технологические компании сд...