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रविवार, 23 नवंबर 2008

महान पिता की महान बात बेटे के लिए...



अमेरिका के मशहूर राष्ट्र पति अब्राहम लिंकन ने अपने बेटे के टीचर से लैटर के द्वारा बात की वो भी महान अंदाज में ....


अमेरिका के महान और राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अपने बेटे के हेडमास्टर को एक चिठी लिखी थी । काफी साल बाद भी एक पिता की सलाह आज उतनी ही खरी है, जितनी कल थी, लैटर कुछ इस तरह से था....


"उसे बहुत कुछ सीखना है। में जानता हूँ की सभी इंसान इमानदार और सच्चे नही होते हैं , लेकिन हो सके तो उसे किताबू के जादू के बारे में सिखाइए । इसके अलावा हो सके तो उसे चीजौं के बारे में सोचने का वक्त भी दीजिये, ताकि पंछियू के आस्मां में उड़ान भरने, मधुमखियौं के धुप में थिरकने और हरे भरे वादियू पर फूल के खिलने के रहस्यौं पर सोच सके। स्कूल में उसे सिखाइए की धोखा देने से असफल होना अच्छा है। भले ही दुनिया उसके बिचारू को ग़लत बताये, लेकिन वह अपने सोच पर भरोसा रखना सीखे। उसे विनम्र लोगूँ के साथ विनम्रता और सख्त इन्सानू के साथ सख्ती करना सिखाइए । उसे इतनी ताक़त दीजिये की वह लकीर का फकीर होकर भीड़ के साथ न चल पड़े। उसे सिखाइए की वह सबकी बाते सुने लेकिन उन्हें सच की कौसौटी पर कसे और केवल सही चीजौं को ही मंजूर करे। उसे सिखाइए की कैसे दुःख में भी हंसा जाता है...की आंसू अगर बहे तो उसमे कोई शर्म नहीं है। उसे सिखाइए की सनकी लोगूँ को झिड़क दे और बहुत मीठी-मीठी बातू से सावधान रहे। अपनी ताक़त और दिमाग की ऊंची कीमत तो लगाये, लेकिन अपने दिल और आत्मा का सौदा न करे। उसे सिखाइए की अगर उसे लगता है की वह सही है तो सामने खड़ी हुई चीखती भीड़ को अनसुना कर दे। उसके साथ नरमी से पेश आइये, लेकिन हमेशा गले से लगाकर मत रखिये क्यूंकि आग में टाप कर ही लोहा फौलाद बनता है।
उसे इतना बहादुर बनाइये की वह आवाज उठा सके, इतना धैर्यवान बनाइये की बहादुरी दिखा सके । उसे ख़ुद में भरोसा करना सिखाइए, ताकि वह इंसानियत में भरोसा रख सके। मेरी उम्मीदे ढेर सारी हैं, देखते हैं की आप क्या कर सकते हैं। मेरा बेटा एक अच्छा बच्चा है । "
.....अब्राम लिंकन .....

सौजन्य से आलोक भदौरिया

इंसान की ऐसी क़द्र के लिए जिम्मेदार कौन?

क्या इंसान ने जन्म लेकर गुनाह किया ? मानवता कहा रहः गई? ऐसी हालत के लिए कौन जिम्मेदार है?हमें विश्व में इस मामले पर एक होकर बैठकर सोचना होगा की कम से कम हर एक इंसान को पेट भर खाना तो मिले ....
ये आप ऊपर जो फोटोग्राफ देख रहे हैं इसे विश्व का सबसे ख्याति प्राप्त इनाम मिल चुका है । जिसे पुलित्ज़र इनाम कहा जाता है और जिसने ये फोटोग्राफ खीची है उनका नाम है केविन कार्टर ।ये फोटोग्राफ सूडान देश की है जहा पर १९९३ में आकाल पड़ गया था और उसी अकाल के प्रभाव के कारन हमें ऐसी हालत देखनी पड़ी है॥ पीछे बैठे
गिद्ध बच्चे के मरने का इंतज़ार कर रहा है जिससे वो उसे नोच- नोच कर खा सके...
इससे भी बड़ी दुखद बात ये है की श्रीमान केविन कार्टर के फोटो खीचने के ३ महीने के उपरांत उन्हूने दुखी हो कर डिप्रेशन के कारन आत्मा हत्या कर ली....दिल को झकझोर देने वाले इस मसले से इंसान को सबक लेने की जरूरत है , और जल्द कोई ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत है । आख़िर इस दुनिया में जीने का सबको अधिकार है.......

गुरुवार, 20 नवंबर 2008

आधुनिक समुद्री लूटेरे







आधुनिक समुद्री लूटेरे समुद्री लूटेरे जो न सिर्फ़ एक खतरनाक खेल खेलते हैं बल्कि ये अन्तराष्ट्रीय गिरोह का खास हिस्सा भी रहे हैं. पिछले कुछ दिनू से हम इन पैरेट्स के बारे में सुनते आ रहे हैं और पढ़ते आ रहे हैं और ये भी सुना की ये लोग सोमालिया के रहने वाले हैं...जिनके पास अत्याधुनिक हथियार और कुछ छोटी छोटी नाव हैं, सोमालिया एक ऐसा देश जो १९६० में इटली से आजाद हुआ और अफ्रीका एक हिस्सा बना....अभी सरकार के नाम पर वह पर सिर्फ़ टी फ जी यानि त्रंजिस्नल फेडरल गवर्नमेंट नाम का कमजोर संघठन है जिसने अपने आप को सरकार घोषित किया हुआ है...और ऐसे ही कई हिस्से इस देश के अलग अलग गैंग के इशारे पर अपना वजूद बचाए रखे हुए हैं...अब ये छोटे छोटे गैंग विश्व के लिए खतरा बनते जा रहे हैं.. क्यूंकि हर देश के ब्यापारी जहाज़ अदेन की खड़ी से गुजरते हैं कोई तेल तो कोई खाना या अन्य चीज़िएँ ले जाते हैं, और जैसा की हमने सुना और देखा समुद्री जहाजू को ये लूट रहे हैं और फ़िर फिरौती के रूप में मोटा पैसा ले कर छोड़ते हैं...जो न सिर्फ़ उस देश के लिए खतरनाक है बल्कि आने वाले दिनू में और अधिक विश्व व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं...अभी विश्व का सबसे बड़ा तेल टेंकर इनके कब्जे में हैं. अदन के खादी में ये सब खतरनाक खेल इनके द्वारा खेला जा रहा है...इनको पता है पानी में इन्स्सन बच तो सकता नही इसलिए मजबूरन इनको मुह मागी फिरौती मिल जायेगी...पिछले कुछ दिनू स्ताल्ट वेस्सेल बड़ी मुश्किल से इनके चंगुल से मोटी रकम दे कर छूटने में कामयाब हुआ था इसमे काफी भारतीय थे....इन लूतेरोउन को जल्द नही रोका गया तो ये आने वाले समय में और खतरनाक हो सकते हैं......

मंगलवार, 18 नवंबर 2008

बदले-बदले से राजधानी दिल्ली के गांव


बदले-बदले से राजधानी के गांव
राष्ट्रीय राजधानी के वो गांव जिंहूने इतिहास बनते बिगड़ते कई बार देखा है . बदलाव व विकास दोनू इ गावौं को एक नया रूप दे गया . गांव का स्मरण करते ही जहाँ मन में बिभिन्न प्रकार की यादें घर कर लेती हैं। वहीँ आज इन गावौं को गांव की नज़र से देखें तो सब बदला-बदला सा लगता है. मन का ये समय चक्र किसी को नही बख्सता है. परन्तु इन गावौं की सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक व नैतिक हालत आज "परिवर्तन की चौपाल" में बेबस खड़ी है. चौपाल सूनी है । दूसरी नज़र से देखे तो यह यूवाऊ व ताश खेलने वालौं का अड्डा बन चुकी है. वही इन गावौं में नीम और कीकर के पेड़ ढूंढें से नही मिलते. लोगौं का पहनावा बदल गया है, पहले परम्परावादी लिबास पहना जाता था. अब शायद ही कोई पहन कर खुश है. राजधानी का इलाका होने का खामियाजा भी इन गावौं को भुगतना पड़ता है.. विकास के साथ भयानक बदलाव जो देखने को मिल रहा है उससे आने वाली पीढी इनके बारे में किताबो में पढेगी . पहले लोगौं के पास पैसा नही था. अब इतना पैसा आ गया है की लोग गांव से पलायन कर कस्बू में आशियाना ढूंढते फ़िर रहे हैं... कभी समय था बेटी और ज़मीन को बेचने वाला नही मिलता था, आज उल्टा हो रहा है
लोग जमीन के पैसे से सबसे पहले कोठी बंगला और गाड़ी लेते हैं. एक समय था खाने को दो वक्त की रोटी पसीना बहाकर मिलती थी वही आज फास्ट फ़ूड व जंक फ़ूड ने गांव को जकड लिया है. गांव में जाती संप्रदाय का नाम सब लेते हैं लेकंग लेकिन बाहर आकर वही इंसान जाती संप्रदाय को भूल जाते हैं. दो प्रकार की स्थिति नही होनी चाहिए समाज में । सबसे दुखद यह है ki पिछले कई वर्षौं से gaoun का स्वरुप बदला तो hai , परन्तु shikshya को अगर देखे तो कुछ खास बदलाव nahi आया है. अभी भी gaoun में शिक्षया का level बहुत नीचे है. यह halat सोचनीय है. लोगौं का दिमाग अब business में दौड़ने लग गया है. लड़कियौं की तादाद gaoun में और भी कम हो रही है. इसका उदहारण आप हरियाण जैसे राज्य को ले सकते हैं जो न केवल राजधानी से लगा हुआ है बल्कि इस राज्य की आर्थिक हालत utni ख़राब नही है जितनी doosre rajyoun की । सामाजिक रहन सहन, खाना paan काफी बदल चुका ई. कुछ हौज़ खास, पिलंजी , तिहाड़ आदि जो famous तो है, परंतू waha पर gaoun का का vyavsaee karan हो चुका है . यही हाल देहात का भी हो रहा है. यहाँ पर ज़मीन की आसमान chootee कीमते गांव वालौं को बहुत कुछ सोचने पर mazboor कर रही अं.
इन gaoun का भोला भला इंसान आज chatur और चटक बन चुका है. आने वाले समय में यही ज़मीन की कीमत इन gaounoo को ग्रामीण परिवेश से काफी दूर ले जा सकता है. आज विश्व में भारत की पहचान महात्मा गाँधी , ताजमहल और गरीबी के sath sath तेज़ी से विकास करते हुए इस देश के औद्योगिकीकरण के karan भी हो रही है . हमारे देश में लोग इस बात से सायद सहमत न होऊं पर ये सच बात है की अभी भी हम gareebee रेखा को poori तरह पार नही कर सके हैं. राजीनेतिक समीकरण इन gaoun का जाती और संप्रदाय तक सीमित रहा ना की विकास पर आज तक वो भी दल सत्ता में आया वही "लुभावने नारे और वायदे" कर चला गया. राजधानी में बहार के लोग आकर राज कर चले गए. इन गौण की अपनी राजनीती ख़तम नही हो पाती है. चुनाव मके समय पर इनको जाती संप्रदाय याद आ जाता है. महात्मा गाँधी ने कहा था की भारत गौण में बसता है अरथां यह देस गौण की मिलिल उली संस्कृति का वाट वृक्ष्य है. आधुनिक विचारधारा व वैस्वी कारन के कारन गांव में जो बदलाव देखने को मिल रहे हैं उस उसे आने वाली पीढी एक नै मिश्रित संस्कृत से भरपूर होगी. गौण के विकास की बात सब कहते हैं लेकिन कार्य रूप में नही . गो में जाने पर कोठी बंगले देखने को मिलते इं. ग्रामीण परिवेश, रहन सहन कम देखते को मिलता है. हिंसा, द्वेष, जलन की बू आज इन गौण से आ रही है. यही हाल रहा तो थोड़े समय में गांव अपना अस्तित्व पुरी तरह मिटा चुके होंगे और अपना वजूद तलासते फिरेंगे. इसलिए गौण की धरोहर, संस्कृति और ताबा बना को बचाए रक्खने केलिए राजधानी शेत्रोउन के इन गौण को देश के अन्य गौण के लिए एक रोल मॉडल बनना चैये ताकि वे भी कुछ सीख सके और हम अपनेग्रामीण स्वरुप को संभल कर रख sake।

मंगलवार, 11 नवंबर 2008

हाई रे औडी तेरे क्या कहने....


भारतीय बाज़ार में ऑडी नाम की एक करोड़ पति गाड़ी का पर्दार्पण हुआ है, इसको आर ८ का नाम दिया है,ये नाम क्योँ दिया मुझ जैसे कम दिमाग के इंसान के लिए समझना मुश्किल ही नही खतरनाक भी है,अब ये मत पूछियेगा क्योँ और कैसे? खैर आ गई आख़िर एक करोड़ और १९ लाख के आस पास की यह अजीब गाड़ी. कभी मौका मिलेगा तो जरूर बठेंगे इसमे एक बार , आपको क्या लगता है क्या होना चिये इसके अन्दर जो यह इतनी महँगी है, मेरे हिसाब से रसोई घर, टॉयलेट ,बाथरूम, और ड्राइंग रूम तो होना ही चैये मेरे ख्याल से स्वीमिंग पूल भी हो तो बड़ी बात नही है...है ना? जो भी हो भारत जैसे गरीब और विकासशील देश में इतनी महँगी गाड़ी आ गई और आने के बाद क्या रंग खिलाती है ये करोड़ पति आने वाला समय ही बताएगा. एक तरफ़ बेचारी लखटकिया है जो टाटा अंकल लाने में लगे हुए हैं अब तक नही आ पाई, लोग माथे पर हाथ लगाये इंतजार में बठे हैं . इस कार को स्पोर्ट्स कार कहा गया है, अब कौन खिलाड़ी खेलेगा इसके साथ और कौन से खेल के साथ भविष्य ही तय करेगा. बताया गया की १५ कार तो पहले ही बेच चुके हैं. २० कार बेचने का अगले साल टारगेट है. खैर एक बात जरुर है वो ये की दिल्ली प्रशिध ट्रैफिक जरूर इसकी चुम्मा जरूर लेगी ये हमें यकीन है, नही तो सरकार को ऐसे कार के लिए अलग रोड तो बनानी ही पड़ेगी ,. वरना कोई न कोई पप्पी तो जरूर लेगा और इसका डेंट पेंट तो आप अंदाजा लगा ही सकते हैं कितना खास होगा...देन्टर कम से कम १ लाख तो छूने का लेगा ही, देखना ये है की कौन लक्की होगा वो जो इस काम को अंजाम देगा....फ़िर भी बेस्ट ऑफ़ लक्क तो कह ही देते हैं....

रविवार, 9 नवंबर 2008

ख़ुद जाना पड़ता है.....


प्यासा ख़ुद कुंवे के पास जाता है...


गांधीवादी कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्रा की कविता के अंश....
"घटनाये, हम तक आयें,इससे अछा है कि हम घटनाओं तक जाए"

हर काम का समय होता है......



नफरत और प्यार का भी समय होता है...इंसान जिंदगी में बहुत कुछ करता है,कुछ वो याद कर पता है, रख पता है और कुछ वो ऐसे भूल जाता है की जैसे उसने कभी किया ही नही हो, फ़िर भी कई बार इंसान पता होते हुए भी गलती कर बैठता है, और भागता रहता है भीड़ भरे दुनिया में,उसे ये नही पता होता है की हर काम का समय होता है...


बाइबल में भी कहा गया है...
हर काम का मौसम होता है...
हर काम स्वर्ग में तय होता है ,
जीने का और मरने का समय होता है,
बोने का और काटने का भी समय होता है,
ढहाने और बनाने का समय होता है,
रोने और हसने का भी समय होता है,
नाचने और शोक का भी समय होता है,
पत्थर और समेटने का समय होता है,
हताशा का और आशा का समय होता है,
रखने का और फैंकने का समय होता है,
आन्शुऊ का भी और संभलने का भी समय होता है,
रहने का और खुल के कहने का समय होता है,
नफरत का और प्यार भी समय होता है......

गुरुवार, 6 नवंबर 2008

रविवार, 2 नवंबर 2008

खुदा का शुक्र है....जान बची...!!


३ नवम्बर की रात तकरीबन रात के ११ बजे जब घर पर ड्राईवर आया और बोला साहब चलिए गाड़ी आ गई है ऑफिस नही चलना क्या आज ? हम बोले चल रहे हैं भाई लेकिन कुछ देर चलने के बाद रास्ते में ही अचानक एक नई नवेली स्कार्प कार ने पीछे से हमारी गाड़ी को टक्कर मार दी। फ़िर क्या था हम तो पीछे सीट में बैठे थे, हमें अचानक से जोर का झटका लगा और पल भर में ही हम ऊपर नीचे हो गए, halat ऐसी हो गई जैसे किसी ने ankh कान और dimag सब fuse कर दिया हो, और हमारे ऊपर ड्राईवर pandey जी बाबु बाबु जी करते हुए...हमारे दोनु मोबाइल ऐसे बिछडे जैसे मेले में दो यार...खैर आनन् फानन में हम पीछे की तरफ़ के सीसे से baahar निकले जो ki गाड़ी ३ palti खा कर उलटी हो चुकी थी और शुक्र है खुदा का की humme से किसी को कोई khas चोट नही लगी, लेकिन वो जनाब अपनी बीबी दो bachoun के साथ kali kalooti नई नवेली कार में रात के १२ baze night driving पर nikle houn उनको salaam करने को jee करता है। और कार जो की केवल २० दिन पहले रोड पर आई थी, ऐसे चला रहे थे जैसे वही हैं नम्बर एक फोर्मुलारा driver ! khair bahar निकले हाल कुशल poocha सबने और नफा नुकशान नापा फ़िर चले आए ऑफिस ...सभी ने poocha लगी तो नही ? हमने ने कहा लगी थी वो भी अक्ल की, डेल्ही में रोड में चलते हुए इंसान का कुछ नही पता भाई कब क्या हो जाए....बस बचना था किस्मत me आज सो bachi गए warna हो गया kalyan ...इसके लिए इश्वर का धन्यवाद....

आखिर कुंबले को क्योँ नही मिला वो सम्मान...

भारतीय क्रिकेट टीम का महान खिलाड़ी अनिल कुंबले
क्रिकेट के इतिहास के पन्ने से एक महान खिलाड़ी का अंत हो गया...अब हमें ऐसे खिलाड़ी का खेल अंतररास्ट्रीय स्तर पर देखने को नही मिलेगा जिसने अपनी निष्ठां , परिश्रम, और ईमानदारी से देश की सेवा की है....आश्चर्य यह है की क्योँ ऐसे खिलाड़ी को वो दर्जा नही मिल सका जिसने इतनी म्हणत से देश की सेवा की हो....और डर है कही वो आने वाले टाइम में उतना याद न किया जाए जितना सचिन,गावस्कर या फ़िर कपिल किए जाते हैं...कुंबले की कमी भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत बड़ी खाई है, इसे भर पाना इतना आसान नही है, जो पिछले १८ साल से भरी हुई थी। हमें ऐसे महान खिलाड़ी को सलाम करना चाहिए.......