पृष्ठ

शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

होली की आपको हार्दिक सुभकामना....





रंग का त्यौहार 'होली' के मंगल अवसर पर आप सभी को बहुत-बहुत गुलाल, अबीर, रंग,गुजिया के साथ हार्दिक बधाई ! इश्वर करे सभी को खुशियाँ और प्यार और सफलता मिले.....

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

बजट-२०१० ,आंकड़ों का झुनझुना ...



बजट --नाम सुन कर हर नौकरी पेशे वाला इंसान एक बार तो सतर्क हो हो ही जाता है....चाहे वो घर का , दुकान का हो या अपना निजी पाकिट का जो महीने भर के लिए होता है या फिर देश का.......वही बजट आज प्रणव डा ने संसद में टिपिकल बंगाली अंदाज में दिया....जैसे कोई बंगाली महिला आगे आगे और पति उसके पीछे-पीछे जोर जोर से चिल्ला कर , झल्ला कर पैर पटक कर चलता है उसी तरह से प्रणव दा ने भी इस बजट को पेश किया.....

परंपरा के अनुसार बिपक्ष ने विरोध किया...स्वरुप अलग था....लेकिन चेहरे वही पुराने जाने-पहचाने....खैर काम की बात यह की मिला क्या ? देखा जाए तो जी दी पी थोडा बहुत बढ़ा है तो प्रणव दा भी चौड़े हो गए और ऐलान कर डाला आम आदमी का बजट है...लेकिन दूर दराज गाँव के किसी गरीब से पूछा जाए तो पता चल जाएगी असलियत.....अंत में कुछ नहीं दिया तो कुछ नही लिया लेकिन धीरे धीरे लेंगे वाली कहावत यहाँ भी चरितार्थ हुई....और तेल के दाम बड़ा डाले....वो भी बजट वाली रात से ही....कुछ नहीं तो तेल के दाम बढ़ा दो....पता नहीं सरकार क्या सोच के बैठी है.....अब तो गाड़िया भी सेकंड हैण्ड 5000 से लेकर 20000 तक मिल जाती हैं...अगर चलती का नाम गाडी की बात करें तो ! और अगर गाडी चलेगी तो तेल भी भरा जायेगा.....और तेल का सरकार ने तेल निकाल लिया है...साथ में आम आदमी भी पिस रहा है.....


प्रणव दा ने भी ठीक सोचा और ठीक कहा की में साफ़ कहता हूँ, हो भी क्योँ नहीं....सियासत नाम ही चीज़ ऐसी है....पहले बिहार और फिर ४ राज्यौं में चुनाव का जिन्न प्रणव दा को याद है....और अभी तो दो ही साल हुए हैं ना ....आगे देखिये क्या क्या होता है....बिहार में तो कांग्रेस अपनी सब कुछ लगाने को तैयार बैठी है ...जिसकी सैलरी नहीं बढ़ेगी वो क्या करेगा.....ये उन लोगों से पूछो..और ये रेसेस्सन जैसे जिन्न का क्या होगा ?कुल मिलाकर कहें तो एक बार फिर से आंकड़ों का झुनझुना सरकार ने पकड़ा दिया है लोगों के हाथ और बजाते रहो पूरे वर्ष !

बुधवार, 24 फ़रवरी 2010

सचिन का विश्व रिकॉर्ड...गजब की पारी !

क्या शॉट है ....क्या स्टेट ड्राइव मारा है.....मज़ा आ गया.....श्याद ही कोई विश्व में ऐसा होगा जो सचिन के शॉटस पर ये बातें नहीं कहता हो.....२४ फ़रवरी का दिन भी ऐसा ही था...जब सचिन ने विश्व रिकॉर्ड तो तोडा ही साथ ही अजेय भी रहे मतलब नोट आउट २०० रन बना कर ! साथ ही दक्षिण अफ्रीका से सिरीज़ भी जीत ली....पहला मैच बड़ा क्लोज़ रहा...लेकिन ग्वालिअर में सचिन ने गजब की पारी खेल देश को ख़ुशी दे दी. वहीं ममता दीदी का रेल बजट धरा का धरा रह गया.....सब जगह सचिन ही सचिन ही रहा....दूसरी बड़ी खबर पाकिस्तान के विदेश सचिव के पैर भारत में टिके.....और मुलाकातों का दौर चला, लेकिन वे भी मुलाकातों तक ही सीमित रह गए....और उनसे कुछ उम्मीद भी सचिन के आगे सब फीके पद गए....कुल मिलाकर कहें तो सचिन बनाम ममता रहा यह दिन..... सचिन जितने अच्छे खिलाड़ी हैं उतने ही अच्छे इंसान भी....जो किसी भी इंसान को महान बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है वो है 'एक अच्छा इंसान बनना' .सचिन में वो गुण मौजूद है इसलिए वो इस मुकाम तक पहुचे हैं आज....लेकिन उन जैसा खिलाड़ी को यह मुकाम बहुत पहले ही पा लेना चाहिए था, और वर्ल्ड रिकॉर्ड और कोई तोड़ता तो और मजा आता फिर सचिन उस वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ते...और सचिन के वर्ल्ड रिकॉर्ड को फोल्लो करते.....मानता हूँ इच्छाएं असीमित होती हैं लेकिन खेल में इतना होना जायज भी है.

सचिन ने ग्वालियर की वीर भूमि में अपनी वीरता विश्व रिकॉर्ड बना कर दिखाई. जिसमे उन्होंने २०० रन बनाये और नोट आउट रहे. साथ ही इंडियन कैप्टेन महेंद्र सिंह धोनी ने भी गजब के हाथ दिखाए. दिखाते भी क्योँ नहीं सामने सचिन जो थे. . उन्हूने दिखा दिया 'ही इज जीनियस' ! हमारी ओर से सचिन रमेश तेंदुलकर को बहुत-बहुत बधाई ! ...में न्यूज़ रूम में था और मुंबई, दिल्ली से लाइव ले रहा था रेलवे बजट पर अचानक सब कुछ छोड़ कर सचिन पर 'फोकस' होना पड़ा ! एक दम से ताजगी आ गई जबकि तब तक हम थक चुक थे, और खबर नीरस हो रही थी क्यूंकि वही बजट का डंका पीट रहे थे,ये ऐसा हुआ वो ऐसा हुआ...ऐसा होना चाहिए...ब्लाह ब्लाह ब्लाह....जैसे ही २०० रन बनाए हमने भी न्यूज़ रूम में खुशी मनाई, एक कैमरा न्यूज़ रूम लगा दिया गया और लाइव सभी लोग खुसी मनाते हुए 'लाइव' गया.....कुल मिलाकर ममता का रेल बजट फीका कर दिया सचिन के दोहरे शतक ने...ममता बनर्जी का भी लाइव हुआ लेकिन वो मज़ा नहीं आया जो सचिन के दोहरे शतक को देखने में आया. ...सचिन से अब अगले तीसरे शतक के इंतज़ार में .....!

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

Enigmatic personality……is no more….!


Enigmatic personality……is no more….!



Well….. ! It was socking news for me and my close friends….18th feb. was the day when I was in news room, suddenly a line flashed on the TV screen, as a bottom line Breaking….O No….. I was stunned to see that Nirmal Da is no more…..what a setback to all NSDians and those who love theater and for artist fraternity. I still remember when I was in Akashvaani {All India Radio}, I met him through my close friend…We went to All India Radio Canteen, after meeting Danish Sir who was Co-ordinator of FM-II[Now FM Gold]. We had a good chat and ordered 3 place of rice & rajma with lots of ‘Salad’.He asked what’s my future plan…That time I was not impressed with him and thinking that he is just from NSD and doing something related to acting …As I used to visit Mandi House for play, I have special attachment for that place. After meeting 20 minutes I had to enter in to the Studio for the night show….it was my 4th or 5th programme on air. Earlier I was doing with Delhi-D & other channels. He studied in Almora & Nainital, as he hails from Nainital city, a beautiful city in the heart of Central Himalaya.
Later on he moved to London and attached with some Artistic Groups, after that he got first big break from Sekhar Kapur in ‘BANDIT QUEEN’ played character role of Vikram Mallah. Later on he was part of many films & Albums….We will miss him on screen as I liked his long hairs….his dialogue delivery & presentation most of his presence of mind…We will miss him ….Last Salute to Nirmal da…….!

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

निर्मल दा का जाना दुख की बात...........

निर्मल पाण्डेय आज दुनिया से अलविदा कह चुके हैं....उन्हें मुंबई में हार्ट अटैक आया और इश्वर ने एक इंसान को अपने पास बुला लिया...उन्हें हम निर्मल दा भी कहते थे...एक अच्छा इंसान और कलाकार नहीं रहा...उनका जाना ना सिर्फ मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के लिए बल्कि देश ने होनहार एक्टर खो दिया है....अकस्मात् उनका जाना अपने आप में दुःख की खबर है...नैनीताल में उनके घर पर कोई नहीं था....सब लोग मुंबई निकल चुके थे, उनके रिश्तेदार अब नैनीताल में घर पर इकठे होने शुरू हो गए हैं...निर्मल दा ने 'विक्रम मल्लाह' के किरदार को अच्छी तरह निभाया......बैंडिट क्वीन में....दायरा के लिए उन्हूने बेस्ट एक्टर वैलेंती अवार्ड जीता फ़्रांस में ..और गोड मदर में भी उन्हूने अच्छी भूमिका निभाई.....एन एस डी से पास आउट होने के बाद वे लन्दन गए, वहां पर ग्रुप के साथ काम किया....हार्ट अटैक से उनका मुंबई में देहांत हो गया ...और कुमाओं के लोगों के लिए यह बहुत बड़े दुःख की बात है......शानदार कलाकार और इंसान को खोने का दुःख रहेगा...और उनकी अलग अदा को भी हमेशा याद रखा जायेगा......

हमारी ओर से अंतिम सलाम निर्मल दा को ....!


उनके खास साथी मशहूर अभिनेता मनोज वाजपेई जी का ब्लॉग पढ़ा, उन्हूने अपने विचार और संवेदना प्रकट की है यहाँ उनका ब्लॉग में लिखा डाल रहा हूँ !

बहुत याद आओगे निर्मल तुम
Posted: 19 Feb 2010 08:46 PM PST
मेरे दोस्त स्वर्गीय श्री निर्मल पांडे को मेरी तरफ से श्रद्धांजलि। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और उसके परिवार को इस परिस्थिति से उबरने की शक्ति दे। जब मुझे अचानक एक एसमएस आया, अपने प्रिय मित्र अनिल चौधरी का कि निर्मल का देहांत हो गया तो कुछ देर के लिए मैं सुन्न बैठा हुआ था। और फिर आंखों से आंसू निकल पड़े। मन बेचैन हो उठा। फिर लगातार अनिल चौधरी के साथ संपर्क बनाए रखा। आगे की जानकारी के लिए। मैं अपनी सारी मीटिंग्स खत्म करता जा रहा था, लेकिन मन में कुछ और ही चलता जा रहा था। सारी यादें और वो सारे पल जो निर्मल के साथ बिताए थे, मन में उमड़ने लगे।

मुझे अभी भी याद है उसका एक नाटक-राउंड हेड पीक हेड। इस नाटक में उसने अनूठा अभिनय किया था। मुझे अभी भी याद है कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के बाहर नीम के पेड़ तले एक दूसरे की टांग खींचते रहना। मुझे अभी भी याद है कि जब मैं विक्रम मल्लाह के रोल के लिए चुना गया था, तब मुझे सिर्फ यही डर था कि कहीं निर्मल पांडे शेखर कपूर से न मिल ले। क्योंकि अगर वो मिला तो निश्चित तौर पर मुझसे यह रोल छिन जाएगा। वो दिखने में इतना सुंदर था। हुआ वही। जब शेखर से निर्मल मिला तो मुझे उस रोल से हटाकर मान सिंह का रोल दे दिया गया और निर्मल को विक्रम का रोल दे दिया गाय। शेखर ने उसके बारे में कहा कि वो ईसामसीह जैसा दिखता है।

वो था भी इतने सुंदर व्यक्तित्व का मालिक। उस पर दिल हीरे जैसा। बड़े शहर की कोई भी काली छाया उसके दिल को छू नहीं पाई थी। नैनीताल के पहाड़ से आया था। और उस कमाल के व्यक्ति की कमजोरी यही थी कि वो यहां पहाड़ को खोजता रहा। शायद ये हाल हम सभी का है,जो छोटी जगहों से आए हैं। लेकिन, निर्मल कुछ ज्यादा सोचता था इन सबके बारे में। ये शहर की मारधाड़, काटाकाटी उसे पसंद नहीं आती थी।

कुछ दिनों से संपर्क टूटा हुआ था। वो अपने जीवन में रमा था। हम सभी अपने जीवन में अलग अलग व्यस्त थे। जब मैंने उसका पार्थिव शरीर कूपर हॉस्पीटल में देखा तो मैं फफक फफक कर रो पड़ा। कोशिश ये करते हुए कि कोई मुझे देखे नहीं। मैं बस किसी तरीके से वहां से निकल जाना चाहता था। क्योंकि उस दृश्य़ ने विचलित कर दिया था। और सबसे दुख की बात यह है कि इस खबर को मैं कहीं भी नहीं देखता हूं। एक ऐसे व्यक्ति का देहांत हुआ है, जो ‘बैंडिट क्वीन’ के बाद एक हवा के झोंके की तरह आया था। जिसे इस इंडस्ट्री ने सिर आंखों पर बैठाने की कोशिश की थी। लेकिन आज वो ही इंडस्ट्री उसके देहांत की खबर से बेखबर है। बड़ा अजीब है ये सब।

वो चिड़ियों से बातें करता था बैंडिट क्वीन की शूटिंग के दौरान। वो चिड़िया की आवाज के साथ गुनगुनाता था और मुझसे कहता था- मनोज सभी सुर इनकी आवाज में है। इसके बाद वो सारेगामा के सुर निकालकर दिखाता था। और घंटो बैठा रहता था चिड़ियों से बातें करते हुए और सामने तालाब के पानी को देखते हुए। ऐसा लगता था मानो नैनीताल का ताल उसे नजर आ रहा है।

मेरे दोस्त निर्मल तुम बहुत याद आ रहे हो। तुम्हारे साथ बिताए कई पल याद आ रहे हैं। ये उम्र नहीं थी जाने की। लेकिन तुम जहां भी रहो तुम्हें शांति मिले, खुशी मिले। मेरी यही दुआ है ईश्वर से।

तुम्हारा और आपका
मनोज बाजपेयी

बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

गोरे के कारण ड्राईवर पिटा !



कभी कभी जिंदगी में ऐसा हो जाता है जिसके कारन आप हंसी का पात्र भी बन जाते हैं और गुस्सा भी आता है वो भी अपने ऊपर ! और जिस कारन आपके साथ ऐसा हुआ उसके ऊपर भी.....मगर सबसे खास बात आप कर कुछ नहीं सकते हैं...ऐसी ही घटना हमारे एक ड्राईवर के साथ हुई...जो हमें ड्रॉप करने आता है...बड़ा बातूनी है....कुछ भी बात कर लो सब जवाब उसके पास.....जवान लड़का है, पिता पुलिस में, माता जी पंजाब में, खुद टैक्शी चलाता है और उड़ाता है.....लड्कियौं का पुजारी है.....एक दिन मुझे ड्रॉप करने आया ..बोला सर आज पिट गया में.......! मैंने पुचा कैसे और तू पिट गया यकीन नहीं हो रहा है...बोला ऐसा ही हुआ.....दरसल वो दिन में एक गोरे के की गाडी चलता है...बोले तो उसकी गाडी दिन में एक अमरीकन अधिकारी के यहाँ लगी हुई है....और रात को मीडिया की गाडी चलता है....गोरे के बच्चे भी आये हैं....उनको लेकर अंसल प्लाज़ा मार्किट ले गया....गोरा और उसकी बीबी तो चली गई अन्दर....और उनका एक गोद वाला गोरा भी साथ में ले गए...और रह गया दूसरा गोरा बोले तो दूसरा लड़का...उसकी उम्र होगी तक़रीबन ६-७ साल....अब वो अंग्रेजी बोले ये ड्राईवर साहब कुछ सब्द समझते हैं या फिर इशारे इशारे में बोलना समझना होता है....जैसे वेट...गो.......थैंक्स ! ये साहब अपनी लाल कार को अंसल प्लाज़ा के बहार कड़ी कर गोरे परिवार के इंतज़ार में छोटे गोरे के साथ बैठे थे.....इस बीच इनको नींद आ गई...गोरे का बचे ने देखा मिस्टर.......आर यू स्लीपिंग ? ओ आल राईट ...स्लीप स्लीप....! बोल के अंग्रेजी गाने सुनने लग गया.......इस बीच जोर से चिल्लाया गोरे का बच्चा ! इंडियन गर्ल्स आर सो सेक्सी...........ऐसा चिल्लाया की सामने से आ रही दो सुन्दर लड्कियौं ने इन परवचनों को सुन लिया....फिर क्या था....साइड मिरर के पास आ कर इन जनाब को बहार निकाला और जड़ दिए दो थप्पड़ ! धाड़ धाड़ .......! ये जनाब एक तो नींद में थे ऊपर से लड़की ने बाहर निकलने को कह कर ये नसीहत दे डाली थप्पड़ के साथ ....की छोटे बच्चे को बिगाड़ते हुए आपको शर्म नहीं आती....सब देख रहे थे....इनको तो जैसे सांप सूंग गया.....क्या करते ....लड़की पर हाथ उठाते या फिर अपनी सफारी देते ....इनती देर में काम हो चूका था.....और गोरे का बच्चा हँसे जा रहे था.....अन्दर बैठे बैठे.....! थोड़ी देर में गोरा और उसका परिवार आया और छोटे गोरे ने सारी बात बड़े मज़े से बताई .....मोम ! धाड़ धाड़ टू मिस्टर ....! आई लाइक इट....आई लाइक इट....! फिर गोरी की पत्नी ने माफ़ी मांगी....और अपने छोटे गोरे की विशेषता बताई इन सब्दों में...ही इज वैरी नौटी ! वैरी नौटी ! अब इन जनाब को क्या मालूम की नौटी के चक्कर में जिंदगी में पहली बार लड्कियौं से पिट गए.....वो भी अंसल प्लाज़ा जैसे जगह में...!मेरी हंसी भी आ रही थी और सिम्पथी भी थी हमारे ड्राईवर के लिए.......

अमरीका में हनुमान जी का मज़ाक...?



अमरीकी बाज़ार में हिन्दुओं के बलशाली भगवान् बजरंगी बली के हनुमान की मूर्ति का पर्योग खिलोने के रूप में किया जा रहा है, निश्चित रूप से करोड़ों हिन्दू इससे आहत हुए हैं....और अमेरिका का यह घटिया प्रचार जान बूझ कर किया जा रहा है...उसे पता है ये हिन्दू देवता हैं....वह अपने बाज़ार में हनुमान जी को खिलोने के रूप में बेच रहा है.....जो गलत है......! नेवेदा शहर में इस बारे में एक बयान भी जारी किया गया है...यूनिवर्सल सोसाइटी ऑफ़ हिन्दुइज्म की ओर से यह बयान दिया गया है और इसको अनुचित बताया है...साथ ही मांग की है इनका कमर्शल यूज़ गलत है.....आजकल के सूचना क्रांति के युग में सबको पता है कौन क्या है क्या नहीं ....जिस कंपनी ने बनाया है उसको भी नोटिस जाना चाहिए और उसे हिन्दुओं से माफ़ी मांगनी चाहिए..... ऐसा क्योँ होता है हिन्दू देवी - देवता ही मज़ाक का पात्र बनते हैं....अन्य धर्मों पर इतनी आसानी से हाथ नहीं डालते....?अमेरिका की अपनी संस्कृति तो है नहीं ...दूसरों की संस्कृति से खिलवाड़ करना अपना कर्म समझता है.....भारत सरकार को इस पर उचित कार्यवाही कर अमरीका की सरकार से जल्द से जल्द बात करनी चाहिए और इस पर कंपनी को तुरंत माफ़ी मांगनी चाहिए.....और हनुमान जी का ऐसा कोमर्सिअल पर्योग बंद करना चाहिए.......

रविवार, 14 फ़रवरी 2010

मेरा वेलेटाइन डे .....

१३ तारीक शाम न्यूज़ रूम में बैठा था....अचानक खबर आई की पुणे में बम बिस्फोट हो गया है....फेमस जगह जर्मन बेकरी में....जहाँ विदेशी बड़ी संख्या में आते-जाते हैं...लग गई....हर तरफ अफरा तफरी का माहौल, पुलिस , पर्शासन, खुफिया एजंसियां सभी जैसे रात की नींद से जागे.....और टीमें रवाना हुई...कोई मुंबई से कोई दिल्ली से...सारा देश और मीडिया की नज़र वहीं पर लग लगी...हमने भी कवरेज करने के लिए अपने रिपोर्टर को भेजा ....थोड़ी देर में स्क्रीन पर मंजर देखा तो विसुअल्स बड़े सोचनीय थे....बहुत दुःख हुआ...देखकर कितने मासूम मौत के घात उतार दिए गए..सबसे पहले उन लोगों को श्रधांजलि !और इश्वर उनके परिवारों को दुःख सहन करने की ताकत दे !
कहते हैं पत्राकारिता में फीलिंग्स को कण्ट्रोल करके रखना पड़ता है....और इनको आड़े नहीं आने देना चाहिए अपने काम में.....मैंने भी इतने साल रिपोर्टिंग में रह कर यही सीखा था, एक बार फिर से देश पर हमला हुआ...अमन और चैन के दुश्मन फिर से इस सुन्दर देश को अपने कारनामों से लहू-लुहान करने में लगे हैं.....इन सबके खिलाफ पूरे देश को एक जुट खड़ा होना पड़ेगा.अगले दिन १४ फ़रवरी को Velentine Day था इसलिए हम भी प्लान कर रहे थे कैसे कैसे खबर आएँगी, और क्या क्या चलाना चाहिए...सब बम विस्फोट ने सत्यानाश कर दिया....खैर लाइव भी हुए....खबर भी चली.....रात १ बजे ऑफिस से निकले...सुबह जल्दी आने पड़ेगा करके......घर पंहुचा रात 2 बजे...बिस्तर में गिरते ही नीद की बेहोशी छा गई ......ये सोच के की सुबह जल्द उठ के ऑफिस जाऊंगा....सुबह नीद खुली ११ बजे..फटा फट उठा और नहाया धोया, देखा तो कोई भी कमीज में प्रेस नहीं थी..हे भगवान् ! अब क्या होगा...छोटा भाई को ऑफिस के काम से चंडीगढ़ जाना था इसलिए उसकी कमीज नहीं पहन सकता था....क्यूंकि पता नहीं कौन सी ले जाये और कौन सी नहीं ...और मामी जी ने पहले कह रखा था की उसके कपडे मत पैरना.....जल्दी से नहाया, तैयार हुआ और फटाफट कमीज में उलटी सीढ़ी प्रेस की...प्रेस वाले को कपडे देने का समय न मिलने के कारन ऐसा हुआ....तब तक मामी जी ने नास्ता तैयार कर दिया था.....तैयार भी होते रहा और नास्ता भी करता था....चल दिया ऑफिस के लिए...ऑफिस पंहुचा १ बजे.......इस बीच रास्ते में देखा और ख्याल आया की आज तो वेलंटाइन डे है.....चलो देखते हैं क्या फिज़ा देखने को मिलेगी....कहते हैं दिल्ली दिल वालों की होती है..लेकिन 'दिल के दिन' दिल वाले गिने चुने ही दिखे...दिल्ली की सड़कों पर.....देखा तो महिपालपुर चौक खाली...फूल वाले खाली बैठे थे......फिर वसंत विहार..वहाँ भी वही हाल....मुनिरका वही हालत...आर के पुरम फिर वही सीन ......और अंत में दिल्ली में सबसे ज्यादा फूल बिकने वाली सरकारी ग्रामीण जगह 'दिल्ली हाट'.....वहां पर भी शांति...कोई लड़का नहीं कोई लड़की नहीं.....साउथ एक्स आया तो कुछ दिखा ....एक गुलाब लिए लड़का साउथ एक्स में दिखा....सोचा चलो इसने इज्जत रख दी...वेलेंटाइन बाबा की .....मगर लगा लड़की फूल ले या न ले....कहते हैं सबसे ज्यादा ६० फीसदी लड़के फूल खरीदते हैं और बांकी लड़कियां या अन्य.....लेकिन न लड़के दिखे न लड़कियां.....मसला वही ..... सन्डे ! फूल वाले फूलों को देखकर मुश्कारा जरुर रहे थे....मगर कितने पैसे का फूल है ..यह प्रश्न करने की हिम्मत नहीं जुटा सका.....इस साल २०१० में सबसे ज्यादा रास्ट्रीय पर्व सन्डे के दिन ही हैं....मीडिया वालों को छोड़ कर बाकी को नुकशान होने वाला है....मीडिया को कोई फरक नहीं पड़ता है.....क्यूंकि इनके लिए कोई दिन कोई फेस्टिवल नहीं होता है...ये लोग दुनिया को दिखाते तो हैं लेकिन अपने लिए कुछ नहीं कर पाते है.....खैर काम तो काम है ! ऑफिस में काम स्मूथ चल रहा था..इस बीच हमारे बरिष्ठ मान्यवर ने कहा की शाम का खाना आज ऑफिस में होगा....और घर का बना होगा.....इस महान काम में लगा दिया हमारे सहयोगी अजीत और हमारे बरिष्ठ अजय जी, जो हमेशा मदद के लिए तत्पर रहते हैं....और शान्ति और चालाकी से काम करने में यकीन करते हैं....खैर दिन बीता......शाम बीती...और अंत में समय आ गया खाने का....हमारे मान्यवर बरिष्ठ ने कहा की चलो कैफेटेरिया में बैठते हैं ...सभी चले गए वरुण रह गया था...उसको मैंने कहा की चला जा फिर आ जाना...डेस्क पर कोई नहीं है....वैसे बुलेटिन नहीं था...सन्डे होने के कारन ! इसलिए थोडा समय मिला गया...और अंत में सब मिले कैफेटेरिया में ....जो पहली मंजिल पर है.....और हमारा न्यूज़ रूम बेस-मेंट में .राम सर, रुपेश सर, अजय सर, अजीत, वरुण, जीतेन्द्र और अभिषेक जो बाद में आया और आजकल नाईट वाच मैन की भूमिका में है.... और उसी समय पंजाब से लौटा हुआ था....और आउट पुट से राजीव जी...कैफेटेरिया में गया तो देखा की पूरा टेबल तरह तरह के ब्यंजनों से भरा हुआ था...कोई खड़े खड़े कोई बैठे सब लपेटने में लगे हुए थे....और साथ में खाने का मज़ा भी कुछ और ही होता है....मज़ा आ गया..... पनीर, दाल मखनी , हाथ से बनी कोमल रोटी, सब्जी, अचार.......वाह ! मज़ा आ गया....वाह.! सभी ने पेट भर के खाना खाया....!
कुल मिलाकर वेलंटाइन डे शानदार रहा....! अब जून का इंतज़ार है ...क्यूंकि दूसरा वेलेंटाइन डे 12 तारीक ब्राज़ील में मनाया जाता है.....14 फ़रवरी को पूरे विश्व में और १२ जून को ब्राज़ील वाले पागल होते हैं ....उस दिन फूल और गिफ्ट एक दुसरे को देते हैं प्रेमी-प्रेमिका, पति-पत्नी या अन्य लोग.........ब्राजील मनायेगा तो हम भी मना लेंगे.....वैसे भी हम हिन्दुस्तानी दूसरों का फेस्टिवल बड़े चाव से ....शौक से...और गर्व से मनाते हैं.....है की नहीं ......? एक बार फिर से सब को हैप्पी वेलेंटाइन डे......2010 !