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बुधवार, 7 मार्च 2012

होली में भी आरक्षण !



आज देश में होली है....इस अवसर पर सभी को होली की हार्दिक शुभकामना...सुन्दर रंगीला त्यौहार है बशर्ते इसे बदरंग ना किया जाए...अंग्रेज़ कहते हैं हिन्दुस्तानी साल में एक बार पागल होता है वह है होली का दिन..कपडे फटे हुए,रंगीले,मुह काला-लाल किया हुआ...सब भिगोने,पोतने में लगे होते हैं एक दूसरे को ..होली के पहले दिन पता चला जब बिहार डेस्क पर गया और हमारे सहयोगी ने बताया कि बिहार में आज होली नहीं है..इसलिए उसे ऑफिस आना पड़ेगा क्यूंकि आज खबरें आएँगी....कई सालों से होली में भी ऑफिस में मना रहा था..इस बार घर पर हूँ ..लेकिन अपने नहीं बहन के घर पर..दादी का देहांत होने की वजह से अपनी होली तो मननी नहीं है.. इस लिए सोचा बहन के घर चला जाए.....इस बार बिहार और उत्तराखंड में होली आज नहीं बल्कि एक दिन बाद है...में तो चुनाव में ब्यस्त था..इसलिए पता भी नहीं चला होली भी आ रही है...दो ढाई महीने से आज थोडा आराम करने का मौका मिला है..लेकिन यह दो दिन का त्यौहार मनाने वाला 'लफडा' पिछले कुछ सालों से देखने में आया है... अब इसके लिए जिम्मेदार कौन ? परम्परागत पुरोहित या फिर सरकार का कलैंडर बनाने वाला पंडित जो अधिकतर छुट्टियां अपने आगे पीछे कितनी छुट्टियाँ देखकर ' सेट' करता है ..लगता है त्यौहार मनाने में भी 'आरक्षण' लागू कर दिया है...15 -16 साल हो गए हैं घर गाँव की होली देखे,खेले...घर गाँव की होली आज भी मिस करता हूँ...लेकिन त्यौहार एक दिन मनाया जाय तो उचित होगा...यह पंडित जी लोगों और सरकारी बाबू दोनू ज़मात से अपील करता हूँ.

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