सोमवार, 13 दिसंबर 2010

विपक्ष बोला जेपीसी, सरकार बोली 'नो'!


लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाली संसद..में अगर काम काज हो तो कितने दुःख की बात है....जैसे कोई मंदिर हो और उसमे पूजा हो तो कितना बुरा लगेगा ऐसा ही संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान हुआ...सभी ने देखा कैसे विपक्ष अध्यक्ष के कुर्सी के नजदीक अपनी मांग को लेकर चिल्लाता रहा और सरकार की कान में में खुजली तक नहीं हुई.....विपक्ष मांग करता रहा की जेपीसी से पुरे घोटाले की जांच करवाई जाए ....जो 2जी स्पेक्ट्रम के नाम से हुआ है...और सरकारी खजाने को नुकशान पहुचाया है....इस सारे मसले की जांच करवाई जाए....मगर कुछ नहीं हुआ और शीतकालीन सत्र ख़तम हो गया...लगातार २० दिन काम नहीं हुआ....लोक सभा और राज्य सभा दोनु सदनों में काम हो पाने का शर्मनाक रिकार्ड बन गया....!

नौ नवंबर से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में पहले दिन को छोडकर हंगामे के कारण दोनों सदनों में प्रश्नकाल नहीं हो पाया। इस पुरे मसले पर जिसे 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन भी कहा गया है...इसमें हुई अनियमितताओं के चलते सरकारी खजाने को हुए कथित एक लाख 70 करोड रूपए के नुकसान हुआ है...इसी को लेकर विपक्ष मांग कर रहा था मगर पूरे शीतकालीन सत्र पर पानी फेर दिया... इस सबके लिए कौन जिम्मेदार होगा...कौन और किसकी जवाबदेही होगी....और जो खर्चा हुआ वह क्या वाजिब है...?आंखिर आम जनता ने यह सोच कर संसद में नेता को भेजता है की वह वहां पर लोगों की समस्या और देश के विकाश को लेकर आवाज उठाएगा और फैसले लेंगे...लेकिन सब बेकार....संसद के इस सत्र को चलाने में करीब डेढ अरब रूपए का खर्चा आया जबकि दोनों सदनों में 32 बैठकों के दौरान मुश्किल से दस घंटे बैठक चली, वो भी भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच...अगर ऐसा ही होता रहा तो आने वाले समय में इसके बुरे नतीजे हो सकते हैं...क्यूंकि आम जनता खामोश नहीं बैठेगी !

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