सोमवार, 13 दिसंबर 2010

घर में बीबी के 72 टुकड़े, फिर भी शांति ?


कहते हैं प्यार अँधा होता है लेकिन इस अंधेपन में एक इन्सान इतना अँधा हो गया कि उसने अपनी बीवी के ७२ टुकड़े कर डाले और तीन महीने तक फ्रिज में रखे रहा ..इस युगल के २ मासूम जुड़वां बच्चे इस सब से इतने लम्बे समय से अनजान बने रहे...और जिस घर में उनकी मां के के टुकड़े रखे गए थे..जिस बेतरतीब और निर्दयता से उनकी मां को मारा गया था...उसी घर में वे मासूम रह भी रहे थे...अपनी पापी बाप के साथ !लेकिन उनको कोई बताना वाला नहीं था तुम्हारी मां तुम्हारे बाप ने इतनी बुरी तरह क़त्ल कर दिया है. ....
पेशे से सोफ्टवेयर इंजीनियर,राजधानी दिल्ली का रहने वाला है, और उसकी पत्नी भी दिल्ली के द्वारका इलाके कि रहने वाली.....बताया जाता है कि राजधानी देहरादून में ये पिछले कई सालों से रह रहे थे...११ साल पहले प्रेम विवाह करने वाले इस युगल के पास सब कुछ होते हुए भी पता नहीं किस चीज़ कि कमी थी कि इतना बुरा खुनी खेल अपने ही घर में खेल रच डाला.....वो भी उस सख्स ने जो आज के सामाज में पढ़ा लिखा है और एक कुशल प्रोफेसनल ! मैं भी द्वारका में था....घर पर सुबह जब पता चला कि सामने वाले अपार्टमेन्ट के बहार मीडिया के लोग आये हुए हैं...तो पता चला कि देहरादून में हुए क़त्ल कि कहानी के पीछे सामने वाले अपार्टमेन्ट में रहने वाले एक परिवार के साथ लिखी गई है....मैं भी गया...हमारे भी रिपोर्टर आये थे..सभी पत्रकार आये हुए थे....लोग पूछ रहे थे क्या हुआ ..कैसे हुआ ....कब हुआ .....आदि...मगर सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इंसान क़त्ल कर सकता है लेकिन इतना बुरा क़त्ल वो भी अपने परिवार के सदस्य का और वो भी अपनी पत्नी का....जीने मरने कि कसम जिसके साथ खाई हों...जिसे पत्नी माना हो.....रिश्ते नाते कहा रहे..?

क्या इंसान इतना पापी हो सकता हैं....जिस समाज में जन्म लिया है तो उस समाज को इसको समझना भी होगा....आंखिर ऐसा क्योँ हो रहा है...आंखिर हिन्दुस्तानी समाज जो विश्व में मिशाल के साथ पेश होता है ...उसके ऊपर प्रश्न उठने लग गए हैं....अगर ऐसे ही घटना देखने को मिलती रही तो ..वो दिन दूर नहीं जब लोग सामाजिक नहीं बल्कि एक दुसरे के खून के प्यासे हो जायेंगे...और कुछ कुछ ऐसा दिखने भी लग गया है...जो भी हुआ वह अचंभित करने वाला तो था ही. खास बात यह कि जो इंसान अपनी बीवी का क़त्ल करके घर में फ्रिज में तीन महीने रख सकता है और फिर उसी घर में रह भी रहा है....वो इंसान नहीं राक्षस है..इसमें कोई दो राय नहीं है....क्राइम के कई घटनाएं होती,दिखती रही हैं...क्राइम के एंगल से देखे तो यह घटना क्राइम के लिए एक अलग चैप्टर भी लिख गई ..!

1 टिप्पणी:

SSJ ने कहा…

ghor kalyug ka yah vo samay hai jahan pyar kab nafrat main badl jaye aur us nafrat ka anjam kitna bhyankar ho kuchh malum nahi.khoon ke rishte pani ki tarh bah rahe hain jinko sametne wali nadi ke bandh toot chuke hain............sumit.

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