रविवार, 11 जुलाई 2010

ऑक्टोपस का कप या फिर फुटबाल का वर्ल्ड कप?

बनाम
फुटबाल के महाकुम्भ २०१० का आज अंतिम दिन है......और दो टीमें फाइनल में आपस में भिड़ेंगी...हौलेंड जिसे नेदरलैंड भी कहते हैं और स्पेन जो यूरोपियन चैम्पियन भी है....स्पेन के खेल को देखकर लग रहा है वो जीतेगा....लेकिन होलैंड भी छुपा रुस्तम निकल सकता है....और भाग्य ने थोड़ा साथ दिया तो स्पेन के लिए खतरा भी हो सकता है....स्पेन के लिए मनोवैज्ञानिक तौर पर थोडा दवाब रहेगा वो भी उस पुलिस वाले रेफरी का...जिसने पहले भी उल्टे सीधे फैसले दे कर स्पेन को लाल पीला कर दिया था...और आज भी वो लाल पीले कार्ड दिखाकर अपना पुलिसिया खौफ इस खेल में दिखाकर होलैंड के पक्ष में कर सकता है....और इस लातम-लात खेल में किसको लात पड़ेगी ये भी देखने लायक होगी...

वहीं होलैंड भी हमले करने में निपुण है....उसके स्ट्राइकर अच्छे हैं.....सेमीफाइनल तक उसको कोई नहीं पूछ रहा था लेकिन अचानक वो फाइनल तक पहुच गया.....और बड़ी-बड़ी टीम्स बाहर होती गई....ब्राज़ील, फ़्रांस..जर्मनी....इंग्लैण्ड....सब बाहर....! वहीं सट्टा मार्किट में स्पेन के भाव काफी तेज़ है....लेकिन इस विश्व कप में काफी चीज़ें देखने को कम मिली, जो पिछले विश्व कप में देखने को मिलती थी......जैसे इंग्लैण्ड जैसे देश के फैन्स का गुस्सा....और हैरान कर देने लायक गोल्स....पिछले विश्व कप में में हमें जिदाने के गोल देखने को मिले थे जो सच में अजीब से थे...लेकिन इस बार वो हमें देखने को नहीं मिले हैं...स्पेन तकनीकी रूप से मजबूत टीम है...इसमें कोई शक नहीं है...लम्बे-लम्बे पास और सटीक पास देख कर अच्छा लगा...और उनकी मेहनत रंग भी ला रही है...

लेकिन सबसे अजीब इस विश्व कप में एक समुद्री जीव के बारे में देखने को मिली...जिसने अपने पंजे दो बक्सों में से एक में रख कर लोगों की सोच बदल डाली..और पूरा यूरोप हैरान है...जो भविष्यवाणी में यकीन नहीं करता है..जो अपने आप को आधुनिक सोच वाला मानता है..वो भी उसके आगे नत मस्तक है....खैर..ऑक्टोपस नाम का यह अजीबो गरीब समुद्री जीव स्पेन के पक्ष में है...और इससे पहले इसने जर्मनी को हरा दिया था..जबकि खुद जर्मनी का नमक खा रहा है...वहां लोग इसके रातों रात दुश्मन बन बैठे हैं....वहीं भारत में तोता, कौवा, चिड़िया..बन्दर और न जाने कैसे कैसे पंडित अपना जोर दिमाग लगाने में लगे हुए हैं...और अपने हिसाब से अलग अलग टीम को जिताने में लगे हुए हैं...खैर कुछ घंटों में सब साफ़ हो जायेगा लेकिन....एक समुद्री जीव ने यूरोप वालों की सोच बदल डाली.....और सच बात करें तो दो टीम के अलावा अब यह गेम ऑक्टोपस और अन्य पक्षी,तोता के बीच इज्ज़त का सवाल बन बैठा है....ख़ास कर अगर स्पेन जीत जाता है तो ओक्ट्पस की पौ बारह....और क आने वाले समय में कहीं इंडियन पंडितों के लिए यह खतरे की घंटी न बन जाये...?अगर स्पेन जी जाता है और फिर देखिये मिसन ऑक्टोपस लोजिक शुरू होगा मीडिया में...लोग यह जानना चाहेंगे कि क्योँ और कैसे इसकी भविष्यवाणी सच हुई है....? कुल मिलकर फुटबाल वर्ल्ड कप से ज्यादा इस समुद्री जीव ने ज्यादा दिल जीता है..और फेमस भी हुआ है.....इसलिए सिर्फ फाइनल जीतना ही काफी नहीं है...ऑक्टोपस के बारे में भी रिसर्च शुरू होने वाली है....में दोनू में से किसी के पक्ष में नहीं हूँ ...जो अच्छा खेल खेलेगा वो कप उठाएगा...सेमीफाइनल तक में स्पेन के पक्ष में था...क्योँ की वह टीम कमाल की फुटबाल खेल रही है...बाल पर कमाल का कण्ट्रोल देखने को मिला है...इसलिए उसका पलड़ा भारी है...यूरोप की चैम्पियन भी है.....और कई टान्गू वाले बाबा भी उसके पक्ष में बैठ गए हैं.....लेकिन फाइनल में जो टीम अच्छा लातम-लातम मारेगी.... वो जीतेगी...वही कप उठाएगी...
उसको सलाम!
.देखते रहिये......फाइनल....चीयर्स!

3 टिप्‍पणियां:

SSJ ने कहा…

baat bilkul sahi hai jeet to achha khelne wale ko hi milegi ye bhi manana hoga ki samundri jeev ne bhi sochne ko to majbur kar diya hai,akshron ko sahi jagah bitha uska guldasta bana diya jo mujhe behad pasnd aati hai apki post main.

Udan Tashtari ने कहा…

जीत गई स्पेन..ऑक्टोपस बाबा जिन्दाबाद हो गये.

s.dawange ने कहा…

बहोत ही बेहतरी सर

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